प्रियंक शर्मा, ग्वालियर नईदुनिया। एक स्टेशन-एक उत्पाद योजना के तहत स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों व व्यापारियों को प्रोत्साहित करने के लिए रेलवे लगातार कवायद कर रहा है। इसके तहत ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर शजर पत्थर से निर्मित आभूषण यात्रियों को मिलेंगे। इसके लिए मंडल ने रेलवे बोर्ड को एक सूची भेजी है, जिसमें मंडल के सभी स्टेशनों के अलग-अलग उत्पाद शामिल हैं। बोर्ड से अनुमति मिलने के बाद ग्वालियर स्टेशन पर यह स्टाल खोले जाएंगे।

प्रधानमंत्री और रेल मंत्री की पहल पर भारतीय रेलवे में स्थानीय उत्पाद व व्यापार को प्रोत्साहन देने के लिए एक स्टेशन-एक उत्पाद योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना का उद्देश्य रेलवे परिसर का उपयोग कर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना है। रेलवे के इस प्रयास से स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प व हाथकरघा व्यवसाय से जुड़े लोगों को बेहतर अवसर विकसित करने में मदद मिलेगी और रेल यात्रियों के लिए भी स्थानीय उत्पाद की जानकारी होने के साथ ही वे स्टेशन पर ही खरीदारी कर सकेंगे। ग्वालियर, बांदा और मुरैना में शजर पत्थर से निर्मित आभूषण, उरई में चितेरी कला पेंटिंग, चित्रकूट में लकड़ी के खिलौने, ललितपुर में जरी की साड़ी, महोबा में गोरा पत्थर की कलाकृति, दतिया में कांसे की मूर्तियां, डबरा में बेकरी प्रोडक्ट, मोठ में अगरबत्ती, खजुराहो में मिट्टी के बर्तन के अलावा अन्य जिलों के स्थानीय उत्पाद शामिल हैं। मंडल के 103 रेलवे स्टेशनों पर व्यापार करने के लिए हस्तशिल्पी को मंडल रेल वाणिज्य कार्यालय से संपर्क कर पंजीयन कराना होगा। इस पंजीयन का शुल्क रेलवे ने एक हजार रूपये निर्धारित किया है। एक बार पंजीयन के बाद कोई खर्च नहीं करना है। स्टेशन के निर्धारित स्थान पर रेलवे स्टाल तैयार कर देगी। झांसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह का कहना है कि इस योजना के लिए सभी जिलों में पत्र लिखे गए थे। जहां से सभी ने अपने यहां के उत्पादों की सूची भेजी है। मंडल ने इन उत्पादों की सूची रेलवे बोर्ड भेजी है। वहां से अनुमति मिलते ही स्टालों की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

Posted By: vikash.pandey

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