- शरद पूर्णिमा के साक्षी रहेंगे बुधादित्य योग और लक्ष्मी नारायण योग

ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा धरती पर अमृत की वर्षा करेगा। इस दिन चंद्र देव की पूजा के साथ महालक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से सुख और स्वास्थ्य का लाभ मिलेगा। रविवार 9 अक्टूबर तड़के 3:41 से पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ होगा। जो 10 अक्टूबर तड़के 2:25 तक यह तिथि रहेगी। बालाजी धाम काली माता मंदिर के ज्योतिषाचार्य डॉ. सतीश सोनी के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र होने से सुस्थिर योग और वर्धमान नाम के योग के साथ ध्रुव योग बन रहे हैं। इसके साथ ही शरद पूर्णिमा पर्व पर कन्या राशि में त्रिगह योग भी रहेगा। इस दिन कन्या राशि में सूर्य, बुध और शुक्र की युति बनेगी। सूर्य बुध की युति से बुधादित्य योग और बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण योग बनेगा। इन्हें ज्योतिष शास्त्र में राजयोग कहा जाता है। इसी दिन शनि और गुरु अपनी अपनी राशि में वक्री अवस्था में रहेंगे। इस दिन चंद्रोदय का समय शाम 5:58 पर रहेगा।

श्री कृष्ण रचाते हैं महारास

शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। शरद पूर्णिमा के देवता श्री कृष्ण हैं। इस दिन भगवान श्री कृष्ण महा रास रचाते हैं। इसलिए वृंदावन में इसे रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के नजदीक होने से चंद्रमा की शक्ति ग्रहण करने से मनुष्य को यौवन प्राप्त होता है। क्योंकि चंद्रमा की किरणें सभी तत्वों से भरपूर होती हैं।

महालक्ष्मी का होगा व्रत

शरद पूर्णिमा को कोजागरी व्रत का विधान है। महिलाएं महालक्ष्मी देवी की 108 दीपक जलाकर पूजा-अर्चना करती हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन महालक्ष्मी धरती पर भ्रमण के लिए निकलती हैं। खीर के हवन से मां को प्रसन्न किया जाता है। महिलाएं घर की सुख समृद्धि के लिए यह व्रत और पूजा करती है।

शरद पूर्णिमा पर चंद्र पूजन का विधान

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा का भी विधान है। ज्योतिषाचार्य डॉ. सतीश सोनी के मुताबिक चंद्रमा को सबसे पहले अर्घ देना चाहिए। इसके बाद उसका पूजन कर खीर का भोग लगाएं, चंद्रमा की किरणों का तेज रात 10:00 बजे से लेकर 12:00 बजे तक अधिक रहेगा। इसलिए इस बीच खीर के बर्तन को ढक कर खुले में रखना अधिक लाभदायक होता है। सुबह इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है। दूध चंद्रमा की किरणों को अवशोषित कर लेता है। और यह फलदाई होती है।

आश्रमोें और मंदिरों पर लगेगा खीर का भोग

शरद पूर्णिमा के पर्व पर शहर के प्रतिष्ठित मंदिरों व आश्रमों पर खीर का भोग लगाकर प्रसाद श्रद्धालुओं को वितरित किया जाएगा।

Posted By: anil tomar

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