-कोविड का असर हुआ कम, खासी संख्या में सैलानियों के आने की उम्मीद

आनंद धाकड़, ग्वालियर नईदुनिया। समर वैकेशन शुरू हाे चुके हैं, सभी परिवार के साथ आउटिंग की प्लानिंग कर रहे हैं। अगर आपकाे ट्रेनाें में कंफर्म बर्थ नहीं मिल रही या आप शिमला, मसूरी नहीं जा सकते हैं ताे परेशान न हाें, क्याेंकि ग्वालियर चंबल अंचल में भी ढेराें साैंदर्य और पुरातात्विक धराेहर हैं। इन समर वैकेशन में आप अपने परिवार काे अंचल के इन पर्यटक स्थलाें पर लेकर जा सकते हैं। जिससे बच्चाें काे अपने क्षेत्र की पुरातत्विक धराेहराें की जानकारी ताे मिलेगी ही साथ ही यहां का साैंदर्य भी देखने काे मिलेगा। जिसे देखने के लिए केवल देशी ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में आते हैं।

अंचल का समृद्ध इतिहास देशी ही नहीं, विदेशी सैलानियों के मन में कई सवालों को जन्म देता है। इन सवालों का जवाब लेने के लिए वे यहां आते हैं, मगर निराश होकर नहीं लौटते हैं। टूरिस्ट गाइड उनके हर सवाल का जवाब देते हैं। हालांकि सैलानियों के आगमन पर विराम कोविड के कारण लग गया था। अब कोविड का प्रभाव कम हो चुका है। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की फ्लाइट सेवा भी शुरू हो चुकी है। इतना ही नहीं बाहर से आने वाले सैलानियों का अंचल का भ्रमण कराने के लिए टूर एंड ट्रेवल एजेंसियों ने भी तैयारी कर ली है। आइआइटीटीएम के नोडन आफिसर डा. चंद्रशेखर बरुआ का कहना है पर्यटन मंत्रालय का ध्यान इन दिनों ग्रामीण पर्यटन पर भी है। अगर ग्रामीण क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ती हैं तो वहां के परिवारों को अच्छा रोजगार मिलेगी। गांवों में भारतीय संस्कृति बसती है और विदेशी इस संस्कृति को करीब से महसूस करना चाहते हैं। डा. बरुआ ने बताया कि बारिश का मौसम नजदीक है, अब ग्वालियर ही नहीं, अंचल के पर्यटन स्थलों पर देशी विदेशी सैलानी नजर आएंगे।

ग्वालियर है सैलानियों का ठिकानाः टूरिस्ट गाइड पुनीत शर्मा ने बताया कि कोई भी देशी विदेशी सैलानी दिल्ली के रास्ते ग्वालियर पहुंचता है। यहां के बाद वह या तो अंचल की धरोहर को देखने के लिए जाता है या फिर खजुराहो निकल जाता है। ग्वालियर में आने वाला हर सैलानी सबसे पहले किले पर पहुंचता है। आठवीं सदी के इस किले की दीवारों पर उकेरी गई स्थापत्य कला उसे काफी प्रभावित करती हैं। किला परिसर में ही सैलानी को सहस्त्रबाहु मंदिर, सूरज कुंड, कर्ण महल के अलावा बहुत कुछ देखने को मिलता है। इसके बाद वह जय विलास पैलेस पहुंचता है। हालांकि शहर में घूमने के लिए और भी दर्शनीय पर्यटन स्थल हैं।

पैकेज में शामिल मितावली-पड़ावलीः टूर एंड ट्रेवल एजेंसी चलाने वाले विकास गुप्ता कहते हैं सैलानियों को दिए जाने वाले पैकेज में मितावली-पढ़ावली को भी शामिल कर लिया गया है। यहां स्थित चौसठ योगिनी मंदिर को सर्वाधिक सैलानी देखने के लिए पहुंचते हैं। मुरैना जिले में आने वाला यह क्षेत्र पड़ावली के पास स्थित मितावली गांव में आता है। 1323 ईस्वी के शिलालेख के अनुसार इस मंदिर को कच्छप राजा देवपाल ने बनवाया था। यह क्षेत्र ग्वालियर से 40 किलोमीटर दूर है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मंदिर को 1951 अधिनियम के तहत एतिहासिक स्मारक घोषित किया। यह मंदिर लगभग सौ फीट ऊंची पहाड़ी पर है।

ग्वालियर से 120 किमी दूर शिवपुरी की छतरीः ग्वालियर आने वाले सैलानी एक बार शिवपुरी भी जाता है। बारिश के मौसम में सर्वाधिक सैलानी यहां पहुंचते हैं। इस मौसम में मनोरम दृश्य भदैया कुंड का बनता है। ग्वालियर से लगभग 120 किलोमीटर दूर स्थिति शिवपुरी की छतरी खास है। परिसर में कोई एक नहीं, बल्कि संगमरमर से बनीं कई छतरियां हैं। यहां पर डाकू हसीना फिल्म के एक गीत की शूटिंग भी हो चुकी है। इस छत्री का निर्माण सिंधिया राजवंश ने कराया। ये छतरियां दूर से ही पर्यटकाें काे खासा आकर्षित करती हैं।

भिंड का पर्यटन भी करता है आकर्षितः ग्वालियर से 32 किलोमीटर दूर स्थित भिंड भी सैलानियों कीपसंद में शामिल है। यहां घूमने के लिए मल्हार राव होल्कर की छतरी, अटेर का किला और मंदिरों में, वनखंडेश्वर मंदिर है। अटेर के किले का निर्माण राजा बदन सिंह और बखत सिंह ने 1664-1668 के मध्य कराया था। मल्हार राव होल्कर की छतरी 1766 में महारानी अहिल्या बाई होलकर ने महान मराठा जनरल के सम्मान मे बनाई थी। यह अपनी सुंदर नक्काशी और शानदार वास्तुकला के कारण सबसे अलग है। यह इंदौर में होलकर शासकों के छतरियों के पैटर्न के समान है, जो फूलों और पत्ती के पैटर्न के साथ सजावटी रूप से नक्काशीदार हैं। मराठा शैली छतरी के शिखर गुंबद और कमान के एक सुंदर मिश्रण का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिस पर कलश को बहुत ही आकर्षक तरीके से बनाया गया है। छतरी की पहली मंजिल काे आकर्षक चित्रों से सजाया गया एक स्तंभित हाल है।

ग्वालियर आने वाले सैलानियों की स्थिति

साल देशी विदेशी

2016-17 196624 1226

2017-18 262143 1283

2018-19 315658 1624

2020-21 178205 452

(2020 में कोविड आने के कारण अधिक संख्या में सैलानी नहीं आए। आंकड़ा जनवरी से मार्च तक का है)

Posted By: vikash.pandey

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