Shravan somvaar 2021: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सावन मास की कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि हाेने से सावन साेमवार काे शिव मंदिराें में भक्ताें की खासी भीड़ रही। अचलेश्वर मंदिर में भक्ताें ने गर्भगृह में जाकर भगवान भाेलेनाथ के दर्शन किए। सुबह से शिवालय बम-बम भाेले के उदघाेष से गूंज गए। मंदिराें में काेराेना गाइड लाइन काे ध्यान में रखते हुए मास्क लगा हाेने पर ही प्रवेश दिया गया। वहीं अचलेश्वर पर लाेगाें से काेराेना टीका लगा हाेने पर ही मंदिर में प्रवेश की अपील भी की गई।

हिंदू धर्म में नवमी की तिथि का विशेष महत्व माना गया है। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि सावन के दूसरे सोमवार को कई शुभ सयोंग भी है। दूसरे सोमवार को नवमी तिथि और कृत्तिका नक्षत्र है। इस दिन भगवान शिव की पूजा का विशेष पुण्य प्राप्त हाेता है। मान्यता है नवमी की तिथि में पूजा और शुभ कार्य का फल अक्षय होता है। कृतिका नक्षत्र का स्वामी सूर्य और राशि के स्वामी शुक्र है। सूर्य कर्क राशि में बुध ग्रह के साथ बुधादित्य योग बना रहे हैं। वहीं शुक्र सिंह राशि में मंगल के साथ युति बना रहे हैं। इस नक्षत्र का नाम भगवान शिव के पुत्र कर्तिकेय से जुड़ा है। भगवान कर्तिकेय देवताओं के सेनापति माने जाते हैं। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि दूसरे सोमवार को महाकालेश्वर शिव की विशेष पूजा करने का विधान है। महाकालेश्वर की पूजा से सुखी गृहस्थ जीवन, पारिवारिक कलह से मुक्ति, पितृ दोष व तांत्रिक दोष से मुक्ति मिलती है।

चार महीने बाद गर्भ गृह में श्रद्धालुओं को मिला प्रवेशः कोरोना की दूसरी लहर शुरू होते ही मंदिरों में श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। मगर श्रावण मास में भोले के भक्तों को खुशखबरी मिली है। पूरे करीब चार माह बाद लोगों की आस्था के केंद्र अचलनाथ के गर्भ गृह में श्रद्धालुओं को प्रवेश मिला।

Posted By: vikash.pandey

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