विजय सिंह राठौर, ग्वालियर silver sleeper । ग्वालियर-चंबल में बिटिया को शादी में चांदी की चप्पल पहनाने का अघोषित चलन अब महंगाई को देखते हुए दम तोड़ रहा है। बीते साल इन्हीं दिनों में चांदी के दाम 46 हजार 500 रुपए प्रति किलो थे, जो अब 62500 रुपये किलो हो गए हैं। ऐसे में बिटिया की शान में उसे चांदी की चप्पल पहनाना माता-पिता के लिए महंगा पड़ रहा है। दीपावली के बाद देव उठते ही शादियों के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। ऐसे में सरफा कारोबारियों के यहां से सहालगों की खरीदी शुरू हो गई है।

सराफा कारोबारियों का कहना है कि शादियों के लिए लोग जेवर खरीदने आने लगे हैं। इस साल सोना-चांदी के दाम बीते साल के मुकाबले करीब डेढ़ गुना हैं। ऐसे में जेवर खरीद पाना लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है। लोग कम वजन के जेवर बनवा रहे हैं, जिससे कि रश्म पूरी की जा सके। वहीं हर साल दिवाली से पहले नवरात्र खत्म होते-होते सोना-चांदी जेवर दुकानदारों को 10-12 जोड़ी चांदी की चप्पलों के ऑर्डर मिल जाते थे, मगर इस बार सेंपल के तौर पर ही चप्पलें रखी हुई हैं। ये चांदी की चप्पलें लड़की की शादी में उसे उपहार स्वरूप दी जाती हैं।

पैर पूजते समय यह चप्पलें बेटियों को पहनाए जाने की अघोषित रश्म लोग शान से निभाते हैं। सराफा कारोबारियों ने बताया कि 15 से 50 हजार तक की चांदी की चप्पलें लोग अपने बजट के मुताबिक खरीददते हैं। ग्वालियर-चंबल, खासकर ग्रामीण अंचल में गुर्जर, राजपूत, यादवों में यह मूक प्रथा है, जिसे कई लोग शान से निभाते हैं। 250 ग्राम से 1 किलोग्राम तक की चप्पलें बन जाती हैं, जो ज्यादातर राजस्थान के जयपुर व उप्र के मथुरा से जाती हैं। फिलहाल इस साल इन चप्पलों की डिमांड न के बराबर है।

-हर साल चांदी की चप्पल खरीदने लोग आते हैं, ज्यादातर 250 से 400 ग्राम तक की चांदी की चप्पल बहन-बेटी के पैर पूजने के लिए ले जाते हैं। चांदी महंगी होने के कारण इस बार इन चप्पलों के दाम 50% तक अधिक हैं। फिलहाल न के बराबर लोग ही यह चप्पल मांगते हैं, मगर दाम सुनकर लौट जाते हैं। - गौरव गोयल, सराफा कारोबारी, बालाजी एंपोरियम टोपी बाजार

-चांदी के बिस्किट व ईंट के विकल्प के तौर पर भी इन चप्पलों को लोग उपहार में देते हैं। बेटी की विदाई में यह उपहार रोचक होने के साथ ही भवुक कर देने वाला भी होता है। बेटियां शादी की निशानी के तौर पर इन चप्पलों को सहेजकर रखती हैं। मगर जरूरत पड़ने इन चप्पलों की चांदी को उपयोग किया जा सकता है। हर साल कई लोग यह चप्पलें ले जाते हैं। - जवाहर जैन, अध्यक्ष, सराफा संघ ग्वालियर

Posted By: Sandeep Chourey

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