ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि ) घूसखोर सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा के बंगले से बरामद छह लैपटाप को आखिरकार ईओडब्ल्यू ने शनिवार को खोल लिया। उसमें से चौकाने वाली जानकारियां मिली हैं। लैपटाप से नगर निगम के अलावा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई नियुक्ति पत्र, पोस्टिंग ऑर्डर और जांच बिल मिले हैं। शिक्षा के भी तमाम दस्तावेज हैं। लैपटाप अन्य सरकारी विभागों के काफी संख्या में दस्तावेज मिलने से अधिकारी स्तब्ध हैं। ईओडब्ल्यू को शक है कि प्रदीप वर्मा ने ऐसी कोई फर्म बनाई होगी, जो स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से जुड़े काम करती हो या फिर वह दोनों विभागों में भर्ती रैकेट चलाता रहा होगा। फिलहाल जांच अधिकारी इन दस्तावेजों के प्रिंट निकालकर विभागवार इनकी फाइलिंग कर रहे हैं। संबंधित विभागों से जानकारी जुटाने के बाद एक बार फिर ईओडब्ल्यू की टीम इन दस्तावेज के संग्रहण के संबंध में पूछताछ के लिए प्रदीप वर्मा को बुलाएगी। इसके अलावा चार बैंकों ने खातों की जानकारी ईओडबल्यू को उपलब्ध करा दी है।

नगर निगम के सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा को सप्ताहभर पहले बिल्डर धर्मेंद्र भारद्वाज से पांच लाख की रिश्वत लेते पकड़ा गया था। उसके विनयनगर स्थित बंगले पर छापे में नगर निगम के फाइलों के अलावा आधा दर्जन लैपटाप व एक दर्जन के लगभग पेन ड्राइव बरामद की थी। ईओडब्ल्यू की आइटी विभाग की टीम पिछले सात दिन से इसके लैपटाप के पर्सनल लाक को तोड़कर ओपन करने का प्रयास कर रही थी। ईओडब्ल्यू की टीम को शनिवार को इसमें सफलता मिली है।

नियुक्ति पत्र व पोस्टिंग के आर्डर मिले

लैपटाप में शहर बन रहीं माल्टियों की सूची, बिल्डरों की जानकारी , वैध, अवैध कालोनियों की जानकारी, नगर निगम के कई अधिकारियों की शिकायतें, तथा नगर निगम के स्केन किए महत्वपूर्ण दस्तावेजों का भंडार मिला है। सबसे चौकानी बाली बात यह है कि प्रदीप वर्मा का नगर निगम सिटी प्लानर था। स्वास्थ्य विभाग व शिक्षा विभाग से उसका प्रत्यक्ष रूप से कोई लेना-देना नहीं था। इसके बाद भी उसके लैपटाप से स्वास्थ्य विभाग के नियुक्ति पत्र, पोस्टिंग आर्डर, मेडिकल संबंधी बिल भी मिले हैं। इसी तरह शिक्षा विभाग के दस्तावेजों में नियुक्ति पत्र भी हैं। अभी लैपटाप की और फाइलों को खोलकर देखा जा रहा है। एसपी (ईओडब्ल्यू) अमित सिंह ने बताया कि संबंधित विभागों के आला अधिकारियों को पत्र के साथ इन दस्तावेजों के संबंध में जानकारी मांगी जाएगी। सरकार दस्तावेज का चोरी- छिपे संग्रहण करना भी अपराध की श्रेणी में आता है।

चार खातों की जानकारी आई: किसी में 88, तो किसी में 64 हजार जमा

ईओडब्ल्यू को छापे में छह बैंकों के 12 के लगभग पास बुकें मिलीं थीं। यह खाते प्रदीप वर्मा के अलावा, उसके भाई प्रशांत, पत्नी व भाई की पत्नी के नाम पर थे। शनिवार को यूनियन बैंक द्वारा भेजी गई जानकारी में बताया गया है कि प्रदीप के खाते में 64 हजार रुपये, पीएनबी में भाई प्रशांत के खाते में 88 हजार रुपये और ग्रामीण बैंक में प्रदीप, उसके भाई की पत्नी के खाते में 56-56 हजार रुपये की राशि जमा है।

पैन कार्ड में गलत जानकारी होने पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज होना तय

रिश्वतखोर के बंगले से छह पैन कार्ड भी मिले थे। यह पैन कार्ड मां, भाई, पत्नी और भाई की पत्नी के नाम पर हैं। एक-दो अन्य लोगों के भी पैन कार्ड मिले हैं। इन पैन कार्डों में पति व पिता के नाम बदले हुए हैं। आशंका यह भी है कि यह गड़बड़ी घूसखोरी से अर्जित की गई संपत्ति को छिपाने के लिए की गई है। ईओडब्ल्यू के अधिकारी भी यही मान रहे हैं। यह गड़बड़ी गंभीर हैं। आयकर विभाग व पैन कार्ड बनाने वाली कंपनी से जानकारी मिलने के बाद आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला अलग से दर्ज होगा।

Posted By: anil.tomar

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