ग्वालियर, (नईदुनिया प्रतिनिधि)। एक माह से लापता युवक का कंकाल गुरुवार सुबह सीवर चेंबर में पड़ा मिला है। युवक की हत्या उसके दोस्त ने ही शराब के नशे में की थी, जब उसने अपने घर की छत से उसे धक्का दे दिया था। वह नीचे गिरा और उसकी मौत हो गई। फिर हत्यारे ने नसैनी लगाई, करीब 12 फीट ऊंचे सीवर चेंबर के ढक्कन तक पहुंचा। यहां से उसने युवक के शव को अंदर फेंक दिया। एक माह से पुलिस गुमशुदा युवक की तलाश में लगी थी, स्वजन बार-बार दोस्त पर ही शक कर रहे थे, तीन बार उसे पकड़ा, लेकिन पुलिस पूछताछ में उससे कुछ नहीं उगलवा पाई थी। आखिर परिवार वालों को ही सीवर चेंबर के पास युवक की चप्पल पड़ी मिली, फिर उन्होंने ही नगर निगम की टीम को बुलाया, जो सीवर चेंबर में उतरी। यहां युवक का कंकाल मिल गया। उसके कपड़ों से स्वजनों ने पहचान कर ली। इसके कुछ ही देर बाद पुलिस ने आरोपित को हिरासत में ले लिया, पूछताछ करने पर उसने हत्या करना स्वीकार कर लिया। यह घटना जनकगंज थाना क्षेत्र की है।

जनकगंज स्थित ढोलीबुआ का पुल का रहने वाला आरिफ पुत्र हनीफ खान 19 जुलाई को अपने घर पर ही था। इसी दाैरान उसे उसका दोस्त जितेंद्र उर्फ राकेश पाल बुलाकर ले गया। इसके बाद आरिफ घर नहीं पहुंचा। उसके स्वजनों ने जनकगंज थाने में शिकायत की और जितेंद्र पर ही संदेह जताया। तीन बार स्वजनों ने उसे पकड़कर पुलिस को सौंपा, लेकिन पुलिस पूछताछ करके हर बार छोड़ देती थी। स्वजन आरिफ की तलाश कर रहे थे, उसकी लोकेशन भी घर के आसपास ही मिली थी, इसके बाद मोबाइल बंद हो गया था। इसी दाैरान स्वजनाें काे एक चप्पल गुरुवार को अयोध्या कालोनी के पास स्थित सीवर चेंबर के पास पड़ी दिखी। यहां से स्वजनों को ही शक हुआ। उन्होंने नगर निगम को सूचना दी। नगर निगम के कर्मचारी अंदर उतरे तो कांटे में युवक का अंडरवियर उलझ आया। कंकाल को बाहर निकाला गया। इसके बाद पुलिस पहुंची। जनकगंज थाने के सब इंस्पेक्टर पप्पू यादव ने बताया कि कुछ ही देर बाद जितेंद्र को हिरासत में ले लिया। जब उससे पूछताछ की तो उसने हत्या करना स्वीकार किया। वह बोला- 19 जुलाई को दोनों ने साथ में शराब पी थी। शराब के नशे में जुआ खेल रहे थे, जुआ खेलते समय विवाद हो गया और इसके बाद उसने आरिफ को छत से धक्का दे दिया। नीचे गिरने से उसकी मौत हो गई। उसके शव को यहां फेंक दिया।

चप्पल न मिलती तो नहीं सुलझती मौत की गुत्थी, पुलिस गुमशुदा ही मान रही थी: इस पूरे मामले में मृतक के स्वजनों ने ही पूरी वारदात को ट्रेस किया है। पुलिस इसे गुमशुदगी मान रही थी। अगर युवक की चप्पल स्वजनों को नहीं मिलती तो यही पता नहीं लगता कि युवक जीवित है या उसकी मौत हो गई। क्योंकि एक माह पहले उसे मारकर लाश यहां फेंकी गई थी, जो कंकाल में बदल चुकी थी।

Posted By: vikash.pandey

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