• सोनी का स्वास्थ्य बिगड़ने पर नईदुनिया ने किया स्थानीय विधायक दीपिका पांडेय को सूचित, तत्काल मिली स्वास्थ्य सुविधाएं
  • एक महीने पहले ही दुनिया में आ गई धनंजय-सोनी की संतान, हुई प्री-मिच्योर डिलेवरी

विजय सिंह राठौर (ग्वालियर नईदुनिया ) झारखंड के गोड्डा जिले से ग्वालियर तक डीएलएड की परीक्षा देने 1176 किलोमीटर स्कूटी पर सफर करने वाले धनंजय व सोनी हेम्ब्रम को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है। 1 सितंबर 2020 को डीएलएड अंतिम वर्ष की परीक्षा देने सोनी 6 महीने की गर्भावस्था में अपने पति सोनी हंसदा (मांझी) के साथ ग्वालियर आई थी। 21 नवंबर को सुबह 5:55 बजे सोनी ने गोड्डा के भागलपुर रोड स्थित निजी अस्पताल में बेटे को जन्म दिया। बच्चे की प्री-मिच्योर डिलेवरी हुई है, बच्चे का वजन (ढाई किलो) डॉक्टरों के मुताबिक कम है। ऐसे में बच्चा स्वस्थ होने के बावजूद अहतियातन 4 दिन तक डॉक्टरों की देखरेख में अस्पताल में ही रहेगा।

वहीं संतान प्राप्ति की खुशखबरी सबसे पहले धनंजय ने नईदुनिया संवादाता को दी। सुबह 6:50 बजे ही धनंजय ने संवाददाता विजय सिंह राठौर को फोन किया और नईदुनिया द्वारा मुहैया कराई गई तमाम तरह की मदद के लिए धन्यवाद दिया व कृतज्ञता व्यक्त की।

नईदुनिया की सूचना पर विधायक दीपिका पांडेय ने की मदद

धनंजय ने 17 नंवबर को नईदुनिया ग्वालियर संपर्क कर सूचना दी थी कि सोनी का स्वास्थ ठीक नहीं हैं। बच्चे की डिलेवरी में एक माह बाकी था, मगर सोनी को गर्भ संबंधी कोई समस्या हो रही थी। धनंजय ने यह कहते हुए अपनी चिंता जाहिर की कि सरकारी अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल पाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में नईदुनिया ग्वालियर संवाददाता ने झारखंड के महगामा विधानसभा क्षेत्र की कांग्रेस विधायकर दीपिका पांडेय से संपर्क किया गया, और मदद के लिए कहा गया। इसपर विधायक ने भी तत्काल संज्ञान लेते हुए सोनी को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराईं। सोनी निजी अस्पताल में भर्ती थीं, जहां का सारा खर्चा उठाने की जिम्मेदारी दीपिका पांडेय ने ली। साथ ही मौके पर अपने एक प्रतिनिधि को पहुंचाकर सोनी का हालचाल जाना गया। सोनी की सकुशल डिलेवरी होने पर उन्होंने खुशी जाहिर की है व दंपती को बधाई दी है।

ऐसे किया था स्कूटी से ग्वालियर तक 1176 किलोमीटर का सफर

गौरतलब है कि मांझी समाज के धनंजय कुमार, अपनी गर्भवती पत्नी सोनी हेम्ब्रम को डीएलएड की परीक्षा दिलाने तीन दिन स्कूटी चलाकर ग्वालियर पहुंचे थे। गोड्डा जिला बंग्लादेश की सीमा से बमुश्किल 150 किलोमीटर दूर है। ऐसे में धनंजय ने करीब 1176 किमी स्कूटी चलाई और झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश के तमाम शहरों, गांव व कच्चे पक्के रस्तों से गुजरे। परीक्षा दिलाने के लिए दंपति ने ग्वालियर के दीनदयाल नगर किराए से कमरा लिया था।

रेल बंद होने से धनंजय 6 माह की अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर स्कूटी से ग्वालियर आए थे। दोपहिया से इतना लंबा सफर करने को बहुत लोगों ने दंपती से मना किया था। स्कूटी से सफर करने के दौरान तेज बारिश होने पर दंपती ने पेड़ों का सहारा लिया। बिहार के भागलपुर से गुजरते समय बाढ़ का समना किया, गड्ढों के कारण काफी परेशानी हुई। स्कूटी में पेट्रोल भराने के लिए दंपती ने जेवर गिरवीं रखकर 10 हजार रुपये लिए थे।

झारखंड वापसी में ऐसे हुआ था हवाई सफर, कइयों ने लूटी फ्री में वाहवाही

नईदुनिया (जागरण) ने यह पूरी कहानी प्रमुखता से प्रकाशित की थी। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर समेत अन्य ने मदद की पेशकश की। मगर अडानी ग्रुप ने धनंजय व सोनी के लिए फ्लाइट के टिकट करा दिए। इस तरह स्कूटी से ग्वालियर तक आने वाला दंपती हवाई जहाज से वापस घर लौटा था। ग्वालियर में रहने, खाने की व्यवस्था जिला शिक्षा अधिकारी ने की । अल्ट्रासाउंड आदि आदि स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था कैट ने की। स्कूटी को भी बस के माध्यम से गोड्डा पहुंचा दिया गया। कई लोगों आर्थिक मदद भी की। झारखंड ह्यूमेनिटी फाउंडेशन ने भी 5 हजार रुपये की अर्थिक मदद की घोषणा की की थी। मगर ट्वीटर व अन्य संचार माध्यमों पर वाहवाही लूटने के बाद कोई मदद नहीं पहुंचाई। धनंजय का कहना है कि अब तक झारखंड ह्यूमेनिटी फाउंडेशन ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया।

Posted By: anil.tomar

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