ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

वर्तमान में डेयरी उद्योगल में काफी संभावनाएं हैं, लेकिन युवाओं को इस उद्योग के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। दूध उत्पादन के क्षेत्र में तकनीक का सही इस्तेमाल और जानकारी की कमी के कारण कई चुनौतियां हैं। जिसके निदान के लिए मानकों की सही जानकारी होना व अपडेट रहना सबसे जरूरी है।

यह बात रविवार को डीआरडीई के डायरेक्टर डॉ.डीके दुबे ने कही। जीवाजी विश्वविद्यालय स्थित गालव सभागार में तीन दिनसीय राष्ट्रीय सेमिनार शुरू हो चुका है। रविवार को सेमिनार के पहले दिन 'डेयरी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में उद्यमिता मुद्दे और चुनौतियां' विषय पर देशभर से आए एक्सपर्ट्स ने अपनी राय रखी। जेयू के फूड टेक्नोलॉजी विभाग, राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल और दूध डेयरी व्यवसाय संघ के संयुक्त तत्वावधान में यह आयोजन हो रहा है।

इस दौरान डेयरी खाद्य उत्पादों के उपकरण और मशीनरी संबंधी प्रदर्शनी भी लगाई गई। मौके पर वरिष्ठ अतिथि के तौर पर एनडीआरआई करनाल के कुलपति व निदेशक डॉ.आरआरबी सिंह, जेयू रजिस्टार डॉ.आईके मंसूरी, सीआईएफ कोऑर्डिनेटर प्रो.डीडी अग्रवाल, प्रोग्राम कन्वीनर डॉ.जीबीकेएस प्रसाद, एनडीआरआई के कोऑर्डिनेटर डॉ.गोपाल सांखला व प्रोग्राम ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी नरेन्द्र मांडिल मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जेयू की वीसी प्रो.संगीता शुक्ला ने की।

किसने क्या कहा..

प्रो.संगीता शुक्ला-डेयरी प्रोडक्टों का क्रेज कभी कम नहीं होता, ऐसे में युवा इस उद्योग में अपना करियर बना सकते हैं। अब यह युवाओं को सोचना है कि उन्हों जब करने वाला बनना है, या जॉब क्रिएटर।

प्रो.डीडी अग्रवाल-इस व्यवसाय में पुराने मानकों को फॉलो किया जा रहा है। हर दस साल में मानकों को अपग्रेड किया जाना चाहिए।

डॉ.आरआरबी सिंह-आईटी उद्योग केवल तकनीकी वर्ग तक ही सीमित है, जबकि डेयरी उद्योग का क्षेत्र सभी वर्गों के लिए खुला है। देश में हर साल 175 मिलियन टन दूध का उत्पादन होता है, जिसके एक तिहाई प्रतिशत में केवल असंगठित क्षेत्र का योगदान रहता है। इसका सबसे बड़ा कारण तकनीकी जानकारी का अभाव है। छोटे व्यापारियों व किसानों को प्रशिक्षित कर इस उद्योग में अच्छा लाभ कमाया जा सकता है।

चुनौतियां व निदान

मिलावटःयह सबसे बड़ी चुनौती है। कई किसान और छोटे व्यापारी इस संबंध में जानकारी नहीं रखते, जिससे उन पर कार्रवाई हो जाती है। हाल ही में कई जगह सेपरेटा दूध के सैंपल पास होते हुए भी प्रशान द्वारा उसके बेचने पर जुर्माना लगाया गया।

निदानःसरकार द्वारा सभी उत्पादों के नामों सहित उनके मानकों को भी क्लियर करना चाहिए। पास सैंपल की लिस्टिंग जरूरी है। साथ ही हर दस साल में मानक अपग्रेड होना चाहिए।

भ्रम की स्थितः कई छोटे व्यापारी और किसान क्वालिटी और मिलावट में अंतर नहीं समझते। यदि दूध में वसा की मात्रा अधिक या कम हो जाए तो उसे लोग मिलावट समझ बैठते हैं।

निदानः इस संबंध में प्रशासन द्वारा छोटे व्यापारी व किसानों को अवेयर किया जाना चाहिए।

Posted By: Nai Dunia News Network