ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 के परिणाम सामने आने के बाद शहरवासियों की उम्मीदों को झटका लगा है। टाप टेन में आने का दावा कर रहे नगर निगम के अधिकारी अपनी पुरानी रैंकिंग भी नहीं बचा सके। 10 लाख से अधिक आबादी वाले स्वच्छ शहरों में ग्वालियर पिछले साल के मुकाबले तीन पायदान लुढ़ककर 18वें नंबर पर आ गया है। पिछले वर्ष शहर 15वें नंबर पर था, जबकि वर्ष 2020 में 13वां नंबर हासिल किया था। पिछले वर्ष ग्वालियर को सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज में गोल्ड मिला था, लेकिन इस बार कोई अवार्ड हासिल नहीं हुआ है। इस बार नगर निगम को स्वच्छता की 7500 अंकों की परीक्षा में करीब 70 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं।

केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 में कुल 7500 अंकों की परीक्षा रखी थी। इसमें सर्विस लेवल प्रोग्रेस (एसएलपी) के लिए तीन हजार अंक, गार्बेज फ्री सिटी के लिए 1250 अंक, ओडीएफ के लिए एक हजार अंक और सिटीजन फीडबैक के 2250 अंक रखे गए थे। निगम का दावा था कि गार्बेज फ्री सिटी की सेवन स्टार रैंकिंग यानी पूरे अंक हासिल होंगे। इसके अलावा ओडीएफ प्लस प्लस होने के बाद वाटर प्लस के लिए दावेदारी की गई थी। इसका अर्थ यह होता है कि शहर में कहीं भी गंदा पानी खुले में नहीं बह रहा है, लेकिन ये दोनों ही दावे फेल हो गए। गार्बेज फ्री सिटी के लिए सेवन स्टार के बजाय 600 अंकों के साथ सिर्फ थ्री स्टार हासिल हो सके, वहीं वाटर प्लस के बजाय ओडीएफ प्लस प्लस का खिताब ही बरकरार रह सका है। हालांकि निगम को उम्मीद थी कि सिटीजन फीडबैक के लिए अच्छे अंक प्राप्त होंगे, लेकिन ऐसा भी नहीं हो पाया। देशभर में सिटीजन फीडबैक में छठवें नंबर पर रहने के बावजूद नगर निगम को सिर्फ 1715 अंक ही मिल सके हैं।

-क्यों फेल हुए हम, ऐसे समझें-

1-सर्विस लेवल प्रोग्रेस

कुल अंक-3000

प्राप्त हुए-2289

प्रतिशत-76 प्रतिशत

कारण-सर्विस लेवल प्रोग्रेस के तहत शहर में कचरा उठाना, सीवरेज के ढक्कन, साफ-सफाई, जैविक खाद तैयार करने जैसे घटक शामिल होते हैं। शहर में कचरा उठाने के लिए डोर-टू-डोर कलेक्शन की व्यवस्था तो की गई, लेकिन यह सभी वार्डों में लागू नहीं हो पाई। इसका कारण है कि निगम के पास कचरा कलेक्शन वाहनों की संख्या पर्याप्त नहीं थी। इसके अलावा सात कचरा कलेक्शन सेंटरों में से छह सेंटर धीरे-धीरे बंद हो गए। हालांकि निगम अधिकारी दबी जुबान में स्वीकार कर रहे हैं कि सर्विस लेवल प्रोग्राम में कमजोरी के कारण अंक कम हुए हैं।

2-गार्बेज फ्री सिटी

कुल अंक-1250

प्राप्त हुए-600

प्रतिशत-48

कारण-गार्बेज फ्री सिटी के अंतर्गत मुख्य रूप से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन से लेकर कचरा सेग्रीगेशन और उसका निस्तारण देखा जाता है। यहां निगम के अंक इसलिए कटे, क्योंकि कई प्रयासों के बावजूद घरों से गीला-सूखा कचरा लेने में सफल नहीं हो सके। इसके अलावा कचरा कलेक्शन सेंटरों पर भी सेग्रीगेशन की पूरी व्यवस्था नहीं हो सकी। लैंडफिल साइट बंद होने के कारण कचरे का निस्तारण भी नहीं ठीक तरह से नहीं हो पा रहा था। इन सभी वजहों के चलते यहां अंक कटे और सेवन स्टार का दावा सिर्फ थ्री स्टार तक सिमटकर रह गया।

3-ओडीएफ

कुल अंक-1000

प्राप्त हुए-600

प्रतिशत-60

कारण-नगर निगम के पास गत वर्ष ही ओडीएफ प्लस प्लस का खिताब था। ऐसे में एक कदम आगे बढ़कर वाटर प्लस के लिए दावेदारी की गई, लेकिन शहर में मुरार नदी, स्वर्ण रेखा में खुले में गंदा पानी बह रहा था। इसके अलावा अमृत योजना के तहत बिछाई गई सीवर लाइनें भी उफनकर कोढ़ में खाज का काम करती रहीं। हालांकि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट चालू होने से थोड़ी राहत रही। इन कारणों की वजह से वाटर प्लस की दावेदारी कमजोर होती चली गई और निगम को सिर्फ 60 प्रतिशत अंकों के साथ संतोष करना पड़ा।

4-सिटीजन वाइस

कुल अंक-2250

प्राप्त हुए-1716

प्रतिशत-76

कारण-सिटीजन फीडबैक के लिए नगर निगम ने तेजी से काम किया था और फीडबैक की समय-सीमा खत्म होते-होते देशभर में छठवां स्थान हासिल कर लिया था। निगम अधिकारियों को खुद आश्चर्य है कि छठवें स्थान पर होने के बावजूद उन्हें कम अंक हासिल हुए हैं। हालांकि फिर भी सिटीजन फीडबैक में नगर निगम को पिछली बार की अपेक्षा अच्छे अंक हासिल हुए हैं। निगम ने सिटीजन फीडबैक के लिए एक लाख 64 हजार 544 लोगों की एंट्री दर्ज कराई थी। इससे ऊपर सिर्फ दिल्ली, विशाखापट्टनम, धनबाद, इंदौर और विजयवाड़ा थे।

ऐसा रहा है स्वच्छता का प्रदर्शन

वर्ष रैंक मिली

2016 73वीं

2017 27वीं

2018 28वीं

2019 59वीं

2020 13वीं

2021 15वीं

2022 18वीं

-70 करोड़ रुपए किए खर्च

नगर निगम ने इस बार स्वच्छता के लिए शहर में 70 करोड़ रुपए की राशि खर्च की। इसमें तीन हजार सफाई कर्मचारियों के अलावा टिपर वाहनों की संख्या बढ़ाई गई। वाहनों की जीपीएस मानिटरिंग पर भी अच्छा-खासा खर्चा किया गया। इसके अलावा लोगों में जागरुकता के उद्देश्य से पीआर एजेंसी और आईईसी एक्टिविटी के लिए भी एजेंसी रखी गई। इस पर लगभग 1.80 करोड़ रुपए खर्च भी किए गए, लेकिन यह पैसा किसी काम नहीं आ सका।

फैक्ट फाइल

18वां स्वच्छ शहर 10 लाख की आबादी में।

-3 नंबर प्राप्त हुए प्रदेश के स्वच्छ शहरों में।

-66 वार्ड है निगम सीमा में।

-3 हजार सफाई कर्मचारी हैं निगम के पास।

-210 टिपर वाहन हैं डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए।

Posted By: anil tomar

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