- अचलेश्वर मंदिर का मामला, कोर्ट ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों के छीने

ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। जिला एवं सत्र न्यायालय से अचलेश्वर मंदिर ट्रस्ट को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश पारित कर मंदिर का संचालन जिला प्रशासन के हाथ में सौंप दिया है। दान पेटी सहित अन्नकूट कार्यक्रम जिला प्रशासन की निगरानी रहेगा। दशम जिला न्यायाधीश अशोक शर्मा ने आदेश दिया है कि दान पेटियों को पांच अधिकारियों के हस्ताक्षर से सील किया जाएगा। मंदिर के बैंक खातों को कलेक्टर अपनी निगरानी में लेकर सक्षम अधिकारी से संचालित कराएं। 29 नवंबर को मंदिर पर जो अन्नकूट का आयोजन किया जा रहा है। वह भी जिला प्रशासन की निगरानी में आयोजित होगा। अन्नकूट पर जो भी खर्च किया जा रहा है, उसका डिजिटल या चैक से भुगतान होगा। कैश में पूरा खर्च इंदराज किया जाएगा। कोर्ट के इस आदेश का तत्काल पालन का आदेश दिया गया है।

पंजीयक लोक न्यास कलेक्टर की ओर से जिला न्यायलय में एक आवेदन (संदर्भ) पेश किया गया। लोक अभियोजक विजय शर्मा ने तर्क दिया गया कि 29 नवंबर को मंदिर पर विशाल अन्नकूट का आयोजन किया जा रहा है। इस अन्नकूट पर होने वाले खर्च में अनियमितता बरती जा रही है। खर्च की स्थित स्पष्ट नहीं है। टेंडर प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई है। कोटेशन अनुमोदन के बाद अन्नकूट का आयोजन किया जा रहा है। स्थिति स्पष्ट नहीं है। ट्रस्ट का कार्यकाल पूरा हो गया है, लेकिन चुनाव नहीं कराए गए हैं। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना आदेश दिया है। अचलेश्वर मंदिर के संचालन का अधिकार कलेक्टर के पास रहेगा।

यह रहेगी व्यवस्था

- मंदिर में रखी दान पेटियां कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, माफी आफिसर, पुलिस अधीक्षक ग्वालियर, इंदरगंज थाने के नगर पुलिस अधीक्षक के हस्ताक्षर सील किया जाएगा। किसी अन्य व्यक्ति को दान पेटी खोलने का अधिकार नहीं होगा। एक निश्चित दिन निर्धारित कर दान की राशि को मंदिर के खाते में जमा कराई जाए।

- मंदिर के खातों को कलेक्टर अपनी निगरानी में तुरंत लें। सक्षम अधिकारी की निगरानी में इनका संचालन कराया जाए।

- मंदिर के आय व्यय के अभिुलेखों को अपने अधिपत्य में लें। जिससे कोई भी व्यक्ति अवांछनीय प्रविष्टि नहीं कर सके।

- आवेदन पर अंतिम फैसला आने तक इसी व्यवस्था के तहत संचालन होगा।

जांच कमेटी ने यह पाई थी अनियमितता, इसके बाद जिला पहुंचा मामला

- संतोष सिंह राठौर की शिकायत के बाद कलेक्टर ने एक जांच दल बनाया गया था। जांच दल ने ट्रस्ट की जांच की। इस जांच में सामने आया कि आरके गुप्ता एंड कंपनी चार्टर एकाउंटेंट से वित्त वर्ष 2012-13 व 2018-19 का अाडिट कराया गया। न्यास की बैलेंसीट में संपत्ति का बाजार मूल्य उल्लेख नहीं किया गया है।

-अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास का गठन 23 जून 2005 में जिला न्यायाधीश ने किया था। न्यास अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में असफल रहा है। गरीब व पिछड़े वर्गों के शैक्षणिक व सामाजिक उत्थान के कार्य न्यास ने पूरी क्षमता से नहीं किए हैं। न्यास की गतिविधियां का संचालन लोक न्यास अधिनियम 1962 के अनुसार नहीं हो रहा है।

- मंदिर के पास फूल, प्रसाद की दुकानें है। इन दुकानों से प्राप्त होने वाले किराए आय-व्यय में उल्लेख नहीं है।

-मंदिर में प्राप्त होने वाली दान की वस्तुओं का रजिस्टर संधारण नहीं है। न बैलेंसशीट में दिखाया गया है। दान में प्राप्त वस्तुओं के गबन व चोरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

- अचलेश्वर के जीर्णोद्धार का कार्य बिना खुली निविदा के कराया गया है। निर्धारित समयावधि में कार्य पूरा नहीं किया गया। निर्माण कार्य के बिना प्रमाणीकरण के 1.58 करोड़ का भुगतान भी कर दिया है।

- ट्रस्ट में गबन व धोखाधड़ी को रोकने के लिए बनाए गए नियमों का भी ट्रस्टियों ने उल्लंघन किया है।

- इस रिपोर्ट के आने के बाद मामला जिला कोर्ट पहुंचा था। मामला जिला कोर्ट में लंबित है।

-दान में मिलने वाले आभूषण व वस्तुओं का रजिस्टर संधारित नहीं किया है। न ही बैलेंशीट में इसका उल्लेख है। आभूषणों के गबन व चोरी से इनकार नहीं किया जा सकता है।

इनका कहना है

- अचलेश्वर मंदिर के संचालन के लिए कोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया है। अब मंदिर का संचालन जिला प्रशासन द्वारा किया जाएगा। ट्रस्ट के पदाधिकारी इसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं।

विजय शर्मा, लोक अभियोजक जिला न्यायालय

Posted By: anil.tomar

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