- कोर्ट ने दोनों को साथ रहने के लिए कहा तो पत्नी जाने को तैयार नहीं हुई

ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हाई कोर्ट की एकलपीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निराकरण करते हुए बच्चे को उसकी मां के सुपुर्द करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पति-पत्नी को समझाते हुए कहा कि छह महीने के बच्चे के भविष्य के बारे में दोनों को सोचना चाहिए। दोनों एक साथ क्यों नहीं रह सकते हैं। पति अपने साथ पत्नी को ले जाने के लिए तैयार था, लेकिन पत्नी ने साथ जाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने दोनों को समझाते हुए कहा कि संवाद खत्म नहीं होना चाहिए। यदि साथ नहीं रहना चाहते हैं तो फोन पर बात करते रहें। बात करने से दोनों के मन बदल जाएंगे।

ग्वालियर बिलौआ निवासी अंशु आदिवासी ने अपने बच्चे को वापस लेने के लिए हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि पति भरत त्यागी निवासी खिलवई जिला हापुर उत्तर प्रदेश ने उसके छह माह के बच्चे को बंधक बना लिया है। 20 जून को इस मामले की सुनवाई थी, तब पति मामले की सुनवाई को सुन रहा था, जिसको लेकर कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने कहा कि पिता को अपने छह महीने के बच्चे की अस्पताल में रहकर देखभाल करना चाहिए, उस समय वह कोर्ट में सुनवाई सुन रहा है। बच्चे को कोर्ट में लाने के लिए आदेश दिया था। इसे लाने में एंबुलेंस, डाक्टर व पुलिस कर्मी पर जो खर्च आएगा, उसे बच्चे का पिता वहन करेगा। 21 हजार 260 रुपये बच्चे के पिता को कोर्ट में जमा करने के आदेश दिए थे। साथ ही पांच लाख का बांड भी भरना पड़ा था। बुधवार को भरत त्यागी बच्चे को कोर्ट लेकर पहुंचे। उन्हें फादर्स डे के संबंध में समझाया। पांच साल तक बच्चे के लिए मां जरूरी है, लेकिन उतना ही पिता की जरूरत है। संस्कार पिता से ही मिलते हैं। बच्चे के भविष्य को देखते हुए दोनों एक साथ क्यों नहीं रह सकते हैं। कोर्ट ने दोनों को सोचने के लिए डेढ़ घंटे का समय भी दिया। जब दोबारा सुनवाई हुई तो पत्नी साथ जाने को तैयार नहीं थी। आखिर में कोर्ट ने बच्चे को उसकी मां के सुपुर्द कर दिया।

तथ्य छिपाकर पेश की याचिका, 50 हजार का लगाया हर्जाना

ग्वालियर(नप्र)। तथ्य छिपाकर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाना एक महिला को महंगा पड़ गया। हाई कोर्ट ने उस पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है और हर्जाने की राशि सात दिनों में जमा करनी होगी। मधु गौड़ ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। उसकी ओर से तर्क दिया कि उसकी बेटी को रिश्तेदार के लड़के ने बंधक बना लिया है, लेकिन जिस लड़के पर बंदी बनाने का आरोप था, उसे प्रतिवादी नहीं बनाया। जब उसे प्रतिवादी बनाया तो लड़का-लड़की कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि उनकी मां को पूरी जानकारी है। शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र चौबे ने कहा कि गलत तरीके से याचिका दायर की है। इसके बाद कोर्ट ने मधु गौड़ पर 50 हजार का हर्जाना लगा दिया।

पांच आंगनबाड़ियों में खिलौने दान करने की शर्त पर दी जमानत

ग्वालियर(नप्र)। हाई कोर्ट की एकलपीठ ने दहेज प्रताड़ना के मामले में एक महिला को सशर्त अग्रिम जमानत दी है। उसे पांच आंगनबाड़ियों में बच्चों के लिए खिलौने दान करने होंगे। यह खिलौने विदिशा जिले की आंगनबाड़ी में देने होंगे। खिलौने दान करने के बाद पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट पेश करनी होगी। सपना टेगुरिया पर विदिशा के कुरवाई थाने में दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज है। जिला न्यायालय से जमानत खारिज होने के बाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उनकी ओर से तर्क दिया कि उनके ऊपर जो आरोप लगाए हैं, वह झूठे हैं। पुलिस ने दबाव में आकर एफआइआर की है।

Posted By: anil tomar

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