ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने उस मामले में फारेंसिक साइंस लेबोरेट्री के डायरेक्टर से शपथ पत्र मांगा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि किट नहीं थी। इस कारण रिपोर्ट लेट हो रही हैं। कोर्ट ने पूछा है कि किट किस तारीख को खत्म हुई थी। जब किट खत्म हो रही थी तो उसका प्रबंध पहले से क्यों नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओ डीजीपी विवेक जौहरी ने शपथ पत्र पेश कर बताया कि फारेंसिक साइंस लैब के लिए आवश्यक सामग्री खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए 7 दिसंबर को टेंडर जारी किए जा चुके है।

हरिओम ने हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की। उसके ऊपर दुष्कर्म का आरोप है और वह जेल में बंद है। डीएनए रिपोर्ट नहीं आने के आधार पर उसने हाई कोर्ट से जमानत मांगी थी। कोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट में देरी होने का कारण पूछा था। सागर के लैब प्रभारी ने डीएनए रिपोर्ट में देरी के पीछे रसायन की कमी को बताया था। सिर्फ अति महत्वपूर्ण मामलों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। कोर्ट ने इस मामले को ध्यान में रखते हुए डीजीपी से शपथ पत्र मांगा था। डीपीजी ने शपथ पत्र पेश कर बताया कि सागर की लैब में 2007 व भोपाल में 2020 से जांच की जा रही है। कोरोना संक्रमण के चलते डीएनए जांच के लिए उपयोग में आने वाली किट और विशेष प्रकार रसायन की आपूर्ति प्रभावित हुई। रसायन की आपूर्ति विदेश होती है। कोर्ट ने डीजीपी के शपथ पत्र को रिकार्ड पर ले लिया और सागर के लैब डायरेक्टर से जवाब मांगा है। 10 दिसंबर को इस में सुनवाई होगी। आरोपितो सशर्त जमानत दे दी।

Posted By: anil.tomar

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