-जिला सहकारी केंद्रीय बैंक का वार्षिक प्रतिवेदन पेश, कलेक्टर की मौजूदगी में बैठक

ग्वालियर,(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में बुरे हाल हैं। मंगलवार को वार्षिक बैठक में पेश हुए प्रतिवेदन में खराब परफारमेंस सामने आई है। यहां तक कि बैंक के प्रशासक व कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने अपने उद्बोधन में यह माना कि बकाया लोनों की वसूली न होने से कालातीत बकाया लोन में वृद्वि हुई और इसी कारण किसानों को कर्ज कम वितरण हो पाया है। शासन का रियायती ब्याज दर पर फसल लोन लेने से किसान वंचित रहे हैं, जो कि चिंता का विषय है। अपेक्षा है कि बैंक की आर्थिक स्थिति में सुधार एवं जिले के समग्र विकास के लिए बैंक के बकाया लोन में अदायगी में सहयोग करेंगे।

मंगलवार को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित ग्वालियर की 104वीं वार्षिक साधारण सभा का आयोजन किया गया। इसमें कलेक्टर व बैंक के प्रशासक कौशलेंद्र विक्रम सिंह की मौजूदगी में मुख्य कार्यपालन अधिकारी व पदाधिकारियों की मौजूदगी में प्रतिवेदन पेश किया गया।

पिछली बार 137 लाख लोन बांटा,इस बार 22 लाखः अंशपूंजी वर्ष 2020-21 में 2149 लाख और इस साल भी समान रही। लोन वितरण में वर्ष 2020-21 में 137 लाख रुपये वितरण किया गया और वर्ष 2021-22 में 22 लाख रुपये ही वितरण किया गया। पिछली बार से 114 लाख रुपये कम लोन वितरण किया गया। एनपीए का बकाया लोन से प्रतिशत में वर्ष 2020 में 82 रहा और इस साल 91 रहा।

कैश बैलेंस में भी अंतरः पेश किए गए प्रतिवेदन मे बताया गया कि बैंक में 31 मार्च 2022 को समाप्त वर्ष पर कैश इन हैंड और उसी तिथि को सीबीएस के अनुसार बैलेंस व बीजीएल में दिखाया गया कैश इन हैंड में अंतर मौजूद है। हाथ में नगदी वास्त में 31 मार्च 2022 को शाखा में रखे गए पाठा के अनुसार 75 लाख लगभग अधिकारियों द्वारा सत्यापित किया गया है, लेकिन यही कैश इन हैंड सीबीएस के रूप में तीन करोड़ 29 लाख के लगभग दिखाया गया है। बीजीएल में एक करोड़ 30 लाख लगभग दिखाया गया है। इस तरह से बैलेंस शीट में तीन करोड़ 29 लाख के लगभग दिखाया जा रहा है, जो वास्तविक कैश इन हैंड में दो करोड़ 54 लाख से अधिक दिखाए जा रहे हैं। यह बैलेंस शीट की ट्रू एंड फेयरनेस को प्रभावित करता है। इस अंतर के कारण हेड में गबन व फ्राड की संभावना मौजूद हो सकती है। इसका तुरंत इवेंस्टिगेशन कराया जाना आवश्यक है।

Posted By: vikash.pandey

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close