- कोर्ट ने 7 फरवरी तक डीजीपी से अलग-अलग बिंदुओं पर डीजीपी से मांगा शपथ पत्र, 8 को केस की सुनवाई

ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने मुरैना जिले में लंबित समन, वारंट को लेकर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारिओं से एक उम्मीद थी, जब उनके पास मामला पहुंचेगा तो उसमें सुधार हो गया, लेकिन ,ऐसा नहीं हुआ है। गलत रिपोर्ट देकर कोर्ट का ध्यान भटकाने की कोशिश की है। अब प्रदेश के पुलिस महानिदेश से शपथ पत्र पर सवालों के जवाब मांगने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। कोर्ट ने 7 फरवरी तक शपथ पत्र पर डीजीपी से समन व वारंट को लेकर सवालों के जवा मांगे हैं। 8 फरवरी को याचिका की सुनवाई होगी। सात जनवरी 2022 तक जिले में 3 हजार 350 गिरफ्तारी वारंट लंबित है, उन्हें पुलिस गिरफ्तार कर कोर्ट मेें पेश नहीं कर सकी है।

जिला मुरैना के कोक सिंह का पुरा खंडोली निवासी भूरि बाई को मुरैना के जिला कोर्ट से जमानत मिल गई थी। उनके ऊपर दहेज हत्या का केस दर्ज है। हाई कोर्ट में पति ने यह कहते हुए जमानत याचिका दायर कि उसकी पत्नी को जमानत मिल गई है। इसलिए उसे भी जमानत पर रिहा किया जाए। हाई कोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए पत्नी को मिली जमानत जमानत निरस्त करने के लिए नोटिस भेजा गया था, लेकिन भूरिबाई को को नोटिस तामील नहीं हुआ। इसके चलते कोर्ट ने पूरा मामला संज्ञान में लिया। समन वारंट के तामील होने की स्थिति की जानकारी मांगी। 9 दिसंबर 2021 को समन, लंबित होने की जो जानकारी दी थी, उसमें 3 हजार 800 वारंट लंबित बताए थे। इसके बाद कोर्ट पुलिस अधीक्षक ललित शाक्यवार को तलब किया। एक निर्धारित फारमेट में समन वारंट की जानकारी मांगी। उप पुलिस महानिरीक्षक (डीअाइजी) सचिन कुमार अतुलकर ने शपथ पत्र पेश किया। समन वारंट की रिपोर्ट पेश की, जिसे कोर्ट खारिज कर दिया। अब डीजीपी से निर्धारित बिंदुओं पर डीजीपी से शपथ पत्र मांगा है।

मुरैना में लंबित वारंट व समन की स्थिति

समन व वारंट 7 दिसंबर 2021तक 7 जनवरी 2022 तक

स्थायी गिरफ्तारी वारंट 3738 3350

कर्मचारियों के गिरफ्तारी वारंट 98 51

गिरफ्तारी वारंट म जनता 307 104

पुलिस कर्मचारियों के जमानती वारंट 153 89

जमानती के बाद गिरफ्तार वारंट अाम जनता 254 178

कर्मचारियों के समन जारी 128 95

समन जारी म जनता 222 206

कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक इन बिंदुओं पर मांगा शपथ पत्र

-गृह विभाग द्वारा 30 मार्च 2019 व 3 अप्रैल 2019़ को जारी किए गए परिपत्रों का पालन नहीं किया जाना चाहिए।

-क्या पुलिस गवाहों को सुरक्षा और संरक्षण देने के लिए बाध्य है।

-क्या पुलिस विभाग सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तैयार की गई गवाह संरक्षण योजना का पालन करने के लिए बाध्य है।

-पुलिस द्वारा गवाहों को संरक्षण देने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

-क्या जांच अधिकारी का दायित्व चार्जशीट पेश होने के बाद समाप्त हो जाता है। क्या पुलिस का यह दायित्व नहीं है कि किसी मामले में यह सुनिश्चित किया जाए कि गवाहों को समय पर अदालत में पेश किया जाए।

-क्या समंस वारंट की तामीली में देरी से गवाहों को आरोपियों की दया पर छोड़ा जा रहा है।

-पुलिस को समंस व वारंट की तामीली में रूचि क्यों नहीं है।

-वारंट या समंस की तामीली में देरी लापरवाही है या जानबूझकर ऐसा किया जाता है, क्या यह पुलिस कर्मियों की लापरवाही नहीं है। ऐसे मामले में क्या केवल निंदा की सजा की आवश्यकता है या ये स्पीडी ट्रायल के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

-क्या ऐसे मामलों में लापरवाही करने वालों के खिलाफ विभागीय जांच होना चाहिए। इन बिंदुओं के साथ ही अन्य बिंदुओं पर पुलिस महानिदेशक को शपथ पत्र पर अपना जवाब पेश करना है।

Posted By: anil.tomar

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