दीपक सविता, ग्वालियर नईदुनिया। विकास के नाम पर शहर में बहुमंजिला इमारतें बन चुकी हैं, शानदार डामर की सड़कें बन रही हैं। ऐसे में मानसून सीजन में झमाझम बारिश ताे हाेती है, लेकिन धरती फिर भी प्यासी रह जाती है। जिससे भूजल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। जिस प्रकार माेबाइल काे यदि लगातार इस्तेमाल करना है ताे रिचार्ज करना जरूरी हाेता है, उसी प्रकार यदि आपकाे भूजल की जरूरत है ताे आपकाे इसे रिचार्ज करना हाेगा। इसके लिए आपकाे बाल्टी भरकर गड्ढे में डालने की जरूरत नहीं है, आपकाे केवल एक बार वाटर हार्वेस्टिंग कराना है। जिससे 4 माह बारिश हाेने पर धरती की प्यास बुझ जाएगी और आपकी प्यास अगले 8 माह तक बुझा सकेगी। यदि आपने इसमें लापरवाही बरती ताे वह समय दूर नहीं जब शहर काे पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा।

25 दिन बाद शहर में मानसून की घोषण हो जाएगी। मौसम विभाग ने भी इस साल मानसून के सही समय पर शहर में दस्तक देने के आसार जताए हैं, लेकिन नगर निगम ने आसमान से बरसने वाले अमृत को सहेजने के लिए काेई प्रयास नहीं किए हैं। शहर का भूजल स्तर औसत 150 फीट पर पहुंच चुका है। गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए शासन ने नियम बनाया है कि 1500 फीट से ज्यादा क्षेत्रफल वाले प्रत्येक मकान पर वाटर हार्वेस्टिंग कराई जाए। नगर निगम ने भी शहर में 250 से अधिक वाटर हार्वेस्टिंग कराई हैं। साथ ही सभी विभागों ने जिनमें पीडब्ल्यूडी, जल संसाधन विभाग, जीवाजी विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय, आदि संस्थानाें ने भी अपने परिसरों में वाटर हार्वेस्टिंग कराई हैं। निजी संस्थानों ने भी इस दिशा में पहल की हैं । इस प्रकार शहर में करीब 1000 वाटर हार्वेस्टिंग हुई हैं। खास बात ये है कि पांच साल पहले कराई गई इन वाटर हार्वेस्टिंग को साफ कराने की किसी ने सुध नहीं ली है। वहीं कई जगह ऐसी हैं, जहां पर नगर निगम ने ही वाटर हार्वेस्टिंग को खत्म कर दिया है।

यह है वाटर हार्वेस्टिंग का तरीकाः वाटर हार्वेस्टिंग के लिए मकान के एक हिस्से में गढ्ड़ा किया जाता है, इस गढ्ड़े में कोयला, बारिक पत्थर अथवा संगमरमर के छोटे टुकड़ों की परत बनाई जाती है। इसके साथ ही इसमें रेत की परत भी बनाई जाती हैं। इसके बाद मकान की छत से बारिश के पानी को इस गढ्ड़े तक लाने के लिए पाइप बिछाया जाता है। इस पाइप के जरिए बारिश का पानी एकत्रित होकर सीधे इस गढ्ड़े में पहुंचता है। यहां पर पानी फिल्टर होने के बाद सीधे जमीन में पहुंचता है। कई बार पानी को तेजी से पहुंचाने के लिए जमीन में कुछ फीट तक पाइप भी गाढ़ दिया जाता है, जिससे पानी तेजी से पाइप के जरिए जमीन में पहुंचता है। हर साल एक बारिश से पहले गढ्ड़े को खोलकर उसमें से बजरी को निकालकर साफ पानी से दो से तीन बार धो दिया जाए। साथ ही कोयल को भी धो दिया जाए और अगर वह ठीक से कार्य करने लायक नहीं बचा है ताे उसे बदल दिया जाए।

इतने फीट पर होते हैं इतने हजार रुपये जमा

1500 फीट से अधिक पर --- 7500 रुपये

2000 फीट से अधिक पर ---- 12000 रुपये

3000 फीट से अधिक पर --- 15000 रुपये

मल्टी में प्रत्येक ब्लाक के हिसाब से --- 15000 रुपये जमा होते हैं

250 वाटर हार्वेस्टिंग कराई निगम ने

750 वाटर हार्वेस्टिंग अन्य विभाग एवं प्राइवेट संस्थानों ने

35 हजार रुपये आया प्रति वाटर हार्वेस्टिंग का खर्च

3.5 करोड़ रुपये हो चुका है वाटर हार्वेस्टिंगों पर खर्च

वर्जन-

शहर में जिन मकानों में वाटर हार्वेस्टिंग नहीं कराई है, वहां पर सर्वे कराकर वाटर हार्वेस्टिंग कराई जाएगी। जिससे पानी का संरक्षण हो सके।

बीके त्यागी सहायक सिटी प्लानर नगर निगम

Posted By: vikash.pandey

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