• एक निजी अस्पताल से कोविड पैसेंट को किया गया था सुपर स्पेशलिटी के लिए रैफर
  • एक घंटे तक एंबुलेंस में ही रहे बुजुर्ग, हालत हुई खराब

ग्वालियर( नईदुनिया प्रतिनिधि)। जयआरोग्य परिसर में बने मल्टी स्पेशलिटी में कोविड मरीजों का उपचार किया जा रहा है। शनिवार दोपहर को मल्टी स्पेशलिटी के चतुर्थ माले पर बने आईसीयू में आग लग गई। इस दौरान न केवल सुपर स्पेशलिटी के अंदर कोविड मरीज फंसे हुए थे, बल्कि दूसरे अस्पतालों से मल्टी स्पेशलिटी के लिए रैफर किए गए मरीजों को भी परेशानी उठानी पड़ी। इसकी वजह यह रही कि आग की वजह से इन मरीजों को भर्ती करने वाला ही कोई नहीं था। ऐसा ही कुछ 85 साल के बुजुर्ग को करीब डेढ़ घंटे गंभीर हालत में एंबुलेंस में ही भर्ती होने के लिए इंतजार करना पड़ा। जबकि बुजुर्ग कोविड पैसेंट की हाल काफी खराब थी।

हुआ यूं कि 85 साल के किशन कुमार गुप्ता को कोरोना था और उनका इलाज निजी अस्पताल अपोलो हास्पीटल में चल रहा था। जब निजी अस्पताल में किशनकुमार की हालत बिगड़ी तो हास्पीटल प्रबंधन ने उन्हें मल्टी स्पेशलिटी के लिए रैफर कर दिया। उन्हें एक एंबूलेंस से मल्टी स्पेशलिटी में भेजा गया। जब एंबुलेंस मल्टी स्पेशलिटी में पहुंची तो वहां पर चतुर्थ माले पर आग लगी हुई थी। ऐसे में नीचे बाहर से रैफर होकर आने वाले मरीजों को भर्ती करने के लिए कोई डॉक्टर या स्टाफ नहीं था। बुजुर्ग किशन कुमार गुप्ता को लेकर एंबुलेंस लेकर करीब एक घंटे तक खड़ी रही। चूंकि किशन कुमार का ऑक्सीजन लेवल काफी कम था। इसलिए उन्हें तुरंत भर्ती करने की जरूरत थी। लेकिन उन्हें करीब एक घंटे तक मल्टी स्पेशलिटी के बाहर इंतजार करना पड़ा। इस दौरान उनकी हालत खराब हो रही थी।

एक नर्स व एंबुलेंस ड्रायवर ही था साथ में: किशन कुमार के साथ केवल निजी अस्पताल की नर्स थी और एंबुलेंस ड्रायवर था। परिवार का कोई भी सदस्य आसपास नहीं था। हालांकि कोविड पैसेंट के साथ कोई जा नहीं सकता। लेकिन एंबूुलेंस के आसपास या अस्पताल परिसर में भी उनके परिवार का कोई सदस्य नहीं था। संभवत निजी अस्पताल ने उन्हें बिना सूचना दिए ही हालत खराब होने पर बुजुर्ग को मल्टी स्पेशलिटी के लिए रैफर कर दिया।

ऐसा हो रहा है शहर में: शहर के निजी अस्पताल कोविड मरीजों को भर्ती तो करते हैं। लेकिन जब उनकी हालत खराब होती है तो वे उसे सुपर स्पेशलिटी के लिए रैफर कर देते हैं। चूंकि सुपर स्पेशलिटी सरकारी है और यहां पर मरीजों को भेज दिया जाता है।

Posted By: anil.tomar

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