ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। अपहरण और हत्या जैसे सनसनीखेज अपराध में दस साल बाद पकड़ा गया हत्यारा पुलिस को फिर चकमा देकर भाग गया। उसने अपना भेष भी बदल लिया है। उसने टी शर्ट उतारकर कमर में बांधी, इसके बाद मंदिर में पहुंचकर टीका लगाया। पुलिस की गंभीर चूक यह भी रही कि वह भागते भागते मुरैना हाइवे तक पहुंच गया।

दरअसल दस साल पहले प्राकुल शर्मा की हत्या कर भागा मुकेश परिहार क्राइम ब्रांच ने पकड़ा था। वह नाम बदलकर दिल्ली में रह रहा था। उसे क्राइम ब्रांच ने दिल्ली से ही दबोच लिया। क्राइम ब्रांच ने जिस आरोपी को पकड़ा, उसे बहोड़ापुर पुलिस एक दिन भी नहीं संभाल पाई। आरोपित स्कूल में से पुलिस को चकमा देकर भाग गया। वह मुरैना हाइवे की तरफ भागा है। इसके चलते क्राइम ब्रांच और अलग अलग थाने की टीमें मुरैना भेजी हैं। दोपहर तक पुलिस उस तक नहीं पहुंच पाई। उधर थाना प्रभारी अमर सिंह सिकरवार पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

राजनीतिक संरक्षण से स्टाफ के हौसले बुलंद : इतनी बड़ी घटना होने पर भी सिर्फ तीन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई है। पुलिस महकमे में चर्चा है राजनीतिक संरक्षण के चलते पुलिस अधिकारी भी थाना प्रभारी और अन्य लोगों पर कारवाई करने से बच रहे हैं।

दहेज हत्या के मामले में आरक्षक को 10 साल का कारावास

अपर सत्र न्यायालय ने दहेज हत्या के मामले में आरक्षक दीपक चौहान को दस साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपित को सजा काटने के लिए जेल भेज दिया है। आरक्षक पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थ था। अपर लोक अभियोजक मिनी शर्मा ने बताया कि दीपक चौहान का विवाह 19 मई 2013 को सुषमा के साथ हुआ था। विवाह के बाद दीपक दहेज के लिए उसे प्रताड़ित करने लगा। उसकी प्रताड़ना से तंग आकर सुषमा ने आत्महत्या कर ली। उसने सुसाइट नोट भी छोड़ा था, जिसमें ससुरालीजनों पर क्रूरता का आरोप लगाया था। पुलिस ने जांच के बाद कोर्ट में चालान पेश किया। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने दीपक चौहान को दस साल की सजा सुनाई है।

Posted By: anil tomar

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