विजय सिंह राठौर, ग्वालियर नईदुनिया प्रतिनिधि। इस वर्ष के अंतिम माह में कई पर्व आने वाले है, जैसे काल भैरव अष्टमी, उत्पन्ना एकादशी, मलमास, विवाह पंचमी, गीता जयंती व इस वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा शास्त्री ने बताया कि- मार्गशीष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 7 दिसम्बर सोमवार को काल भैरव जयंती मनाई जाती है। भगवान काल भैरव को भगवान शिव का पांचवां रुद्र अवतार माना जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान काल भैरव का जन्म हुआ। भगवान काल भैरव की पूजा से भूत, प्रेत और ऊपरी बाधा जैसी समस्याएं समााप्त होती है।

उत्पन्ना एकादशी 11 दिसंबर को

उत्पन्ना एकादशी 11 दिसम्बर शुक्रवार को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 10 दिसम्बर दोपहर 12:51 बजे प्रारम्भ होगी और 11 दिसंबर सुबह 10:04 बजे तक रहेगी। उत्पन्ना एकादशी को सभी एकादशियों का प्रारंभ माना जाता है। यह एकादशी हेमंत ऋतु में आती है। इसी कारण से इस एकादशी को अगहन या मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी नाम से भी जाना जाता है। एकादशी व्रत की शुरुआत उत्पन्ना एकादशी से ही मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत के कुछ नियम हैं। जिसके अनुसार जो भी व्यक्ति एकादशी व्रत शुरु करना चाहता है उसे उत्पन्ना एकादशी से ही एकादशी व्रत का प्रारंभ करना होता है। उत्पन्ना एकादशी का व्रत बहुत ही जल्द फल देने वाला माना जाता है। इस एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति को जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है।

सूर्य ग्रहण 14 दिसम्बर को

इस बार वर्ष 2020 का अंतिम सूर्य ग्रहण 14 दिसम्बर सोमवार को पड़ेगा। भारत मे इसका समय रात्रि 7:19 बजे है, यह खण्डग्रास सूर्य ग्रहण होगा जो भारत मे दिखाई नही पड़ेगा। न ही इसका सूतक लगेगा। इसे प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में देखा जा सकता है।

मलमास का प्रारंभ 15 दिसम्बर से

15 दिसंबर मंगलवार को मलमास का प्रारंभ होगा जो 14 जनवरी सुबह 8:13 बजे तक रहेगा। इस दिन सूर्य देव वृश्चिक राशि से गुरु बृहस्पति की धनु राशि मे प्रवेश करेंगे हिन्दू धर्म मे इस माह को शुभ नही माना जाता है इसलिए इस माह में सभी तरह के शुभ कार्य नही किये जाते। मलमास को मलिन मास माना जाता है इसलिए विवाह आदि शुभ कार्य त्याज्य होते है।

विवाह पंचमी 19 नवम्बर को

मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 19 नवम्बर शनिवार के दिन राम व सीता का विवाह हुआ था। पौराणिक युग का यह बहुत बड़ा स्वयंबर था, जिसका वर्णन पुराणों में मिलता हैं। इसलिए आज भी विवाह पंचमी को सीता माता एवम भगवान राम के विवाह के रूप में यह पर्व हर्षो उल्लास से मनाया जाता हैं।माना जाता है कि इस दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा से कुंवारें लोगों को सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है और विवाहित लोगों के वैवाहिक जीवन की सभी परेशानियां समाप्त होती है।

गीता जयंती 25 दिसम्बर को

गीता जयंती के पर्व क्रिसमस के दिन 25 दिसंबर शुक्रवार को मनाया जाएगा। महाभारत काल मे इस दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता उपदेश दिया था। इसे मोक्षदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है।

Posted By: anil.tomar

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