ग्वालियर। तिघरा गांव के पीछे सोनचिरैया अभयारण्य में बसे ग्रामीणों को अमृतधारा मिलने जा रही है। सड़क और पानी के कारण होने वाला पलायन रुक सकेगा। साथ ही अब इन गांवों में शहनाई भी बज सकेगी। सड़क और पानी की कमी के कारण सोनचिरैया अभयारण्य में बसे 24 गांवों के लगभग 60 प्रतिशत से अधिक युवा अभी तक कुंवारे ही हैं। 34 किलोमीटर लंबी सड़क का लगभग 70 फीसदी कार्य पूर्ण हो चुका है। सड़क और पानी की कमी के कारण ग्रामीणों के पलायन और विवाह नहीं होने की खबर नईदुनिया ने 24 फरवरी 2019 को 'जाती रही बहार! न सोनचिरैया लौटी न गांवों में शहनाई बजी' शीर्षक से खबर भी प्रकाशित की थी। पुरानी छावनी से घाटीगांव तक पीडब्ल्यूडी खंड क्रमांक 1 द्वारा सड़क बनाई जा रही है।

यह सड़क तिघरा के आगे बसे कैथा गांव के आगे से सोनचिरैया अभयारण्य से गुजर रही है। यह सड़क कालाखेत, लखनपुरा, गुर्जा सहित 24 गांवों के लिए अमृतधारा लेकर आई है। क्योंकि अभी तक सोनचिरैया अभयारण्य में बसे ग्रामीणों के लिए सड़क मार्ग नहीं था। उन्हें प्रतिदिन दूध बेचने एवं अन्य कार्यों के लिए जंगल के उबड़ खाबड रास्ते से होकर जाना पड़ता था। रास्ता इतना खराब था कि यहां पर सिर्फ मोटर साइकिल और ट्रैक्टर ही चल पाते थे। यहां पर अगर कोई ग्रामीण बीमार हो जाए अथवा किसी प्रसूता महिला को डॉक्टर के पास ले जाना हो तो वह इस यातना भरे मार्ग से होकर गुजरने में ही दम तोड़ दे। 29 करोड़ की लागत से बन रही यह सड़क इन गांवों के लिए जीवनरेखा बनकर आई है। क्योंकि अब इन लोगों की परेशानियों का अंत हो जाएगा।

कुंवारे युवाओं की सूची सौंपकर सड़क बनाने की मांग की थी

24 गांव जिसे चौबीसी कहा जाता है, यहां पर सड़क और पानी की समस्या होने के कारण लोगों ने अपनी बेटियों का यहां पर रिश्ता करना बंद कर दिया था। इस कारण यहां पर 40 की उम्र के पार 400 युवा कुंवारे थे, जबकि पूरे गांवों में कुंवारों की संख्या एक वर्ष पहले 690 थी। यहां पर ग्रामीणों ने शासन को कुंवारे युवाओं की सूची सौंपकर सड़क बनाने की मांग भी की थी।

बोरिंग से मिली जलधारा, रुका गर्मियों में पलायन

गर्मियों के मौसम में सोनचिरैया अभयारण्य में बसे गांवों में पानी की बेहद कमी हो जाती है। हालत यह है कि लोग अपने पशुओं को लेकर इस क्षेत्र को छोड़कर चले जाते थे। लेकिन अब शासन ने प्रत्येक गांव में एक बोरिंग करा दी है। साथ ही ग्रामीणों ने भी खेतों के किनारे बोरिंग करा ली हैं। इससे अब गर्मियों के मौसम में लोगों को पानी की कमी नहीं होगी और उनका पलायन रूक जाएगा।

पुरानी छावनी से घाटीगांव तक सोनचिरैया अभयारण्य से वायपास बन रहा है। इसका कार्य काफी तेजी से चल रहा है लगभग 70 फीसदी कार्य पूर्ण हो चुका है। जल्द ही सड़क का कार्य पूर्ण हो जाएगा। -ओमहरि शर्मा, कार्यपालन यंत्री, पीडब्ल्यूडी खण्ड क्रमांक 1

Posted By: Prashant Pandey

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