विक्रम सिंह तोमर. ग्वालियर। दिपावली के एक महीने पहले से ही शहर भर मे पटाखों की खरीददारी शुरू हो चुकी है। लेकिन इस बार की दिवाली कम प्रदूषण वाली होगी । शहर की पटाखा मार्केट सज चुकी है और इस बार बाजार में 95 प्रतिशत ग्रीन पटाखे ही बिक रहे हैं। गौरतलब है कि ग्रीन पटाखे दिखने और चलाने में आम पटाखों जैसे ही होते हैं लेकिन इनके फटने के बाद इनमें से निकलने वाला धुआं और गैसें साधारण पटाखों की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत कम प्रदूषण करतीं हैं । ग्रीन पटाखों की श्रेणी में फुलझडी, अनार, बम, एयर शाट सहित हर प्रकार के पटाखे उपलब्ध हैं । पहचान के लिए बता दें कि ग्रीन पटाखे के पैकिट पर सीएसआइआर का ग्रीन फायरवर्कस का निशान मौजूद रहता है । पटाखा विक्रेता संताष कुमार बताते हैं कि लोगों का रुझान स्वयं ही ग्रीन पटाखों की ओर आ रहा है। चूंकि साधारण पटाखों से इनकी कीमत में सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत का ही फर्क होता है इस लिए लोग ग्रीन पटाखे ही पसंद कर रहे हैं। हालांकि कुछ लोग साधारण पटाखे ही खरीद रहे हैं लेकिन ऐसे लोगों की संख्या कम है।

हानिकारक कैमीकल रहित होते हैं ग्रीन पटाखे -

ग्रीन पटाखों को लेकर विशेषज्ञ दावा करते है कि इनके निर्माण में हानिकारक कैमीकलों का प्रयोग नहीं किया जाता हैं। वहीं एल्यूमीनियम, बेरियम, पोटेशियम नाइट्रेट और कार्बन जैसे तत्व या तो नहीं होते हैं या कम मात्रा में होते हैं। इससे जब इन ग्रीन पटाखों को जलाया जाता है तब इनसे कम प्रदूषण होता है, वहीं कुछ पटाखें फूटने पर उनमें से भाप भी निकलती है ।

1- पटाखों से निकलने वाले धुंए से तमाम हानिकारक गैसें निकलती हैं जिससे अस्थमा के मरीजों पर घातक प्रभाव पड सकता है । वहीं जो लोग सांस संबंधी बीमारियों से दूर हैं उनको भी गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ग्रीन पटाखे काफी हद तक कम नुकसान दायक साबित होंगे । -

डा.ऋषि मंगल, श्वांस रोग विशेषज्ञ, नई दिल्ली

2- कोई पटाखा चलेगा तो प्रदूषण तो करेगा ही लेकिन ग्रीन पटाखों के साथ प्लस प्वाइंट है कि यह साधारण पटाखों की अपेक्षा कम प्रदूषण करते है । तो स्वाभाविक सी बात है कि पर्यावरण को नुकसान कम होगा ।

एचएस मालवीय, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

Posted By: anil tomar

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