ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना के दो साल लोगों ने राखी का त्योहार आनलाइन ही मनाया। पिछले वर्ष भी लोगों का राखी के त्योहार पर कम ही मिलना जुलना रहा है। इस बार राखी के त्योहार पर बाजार में रौनक दिखाई दे रही है। लेकिन भाई का मुंह मीठा करने के लिए इस बार बहनें मिठाई के स्थान पर ड्रायफ्रूट के पैक अधिक पसंद कर रही है। उसका कारण बताया जा रहा है कि लोग अब स्वास्थ्य के प्रति सचेत हुए हैं। मिठाई में रंग व अन्य कैमिकल की मिलावट से बीमार होने का डर सता रहा है। इसी तरह से सोन पपड़ी पर भी कम ही विश्ववास जता रहे हैं। लेकिन सादा पेठा और ड्रायफ्रूट पर लोग विश्ववास जता रहे हैं इसलिए इनकी मांग बढ़ रही है। दानाओली में पेठा की दुकानें सज चुकी है और माल की उपलब्धता के लिए काम तेज हो गया। इसी तरह से ड्रायफ्रूट के पैकट अब किराने की दुकानों पर सजे हुए हैं। देश में राखी का सबसे अधिक निर्माण कलकत्ता, अहमदाबाद,राजकोट,मुंबई में होता है। इसके बाद बच्चों के गुड्डे,गुड़िया,छोटा भीम,मोटू पतलू जैसे कार्टून की राखियां चाइना से आ रही है जिसकी मांग है पर कम है। फ्रेंडसिप लुक व स्टोन से बनी राखी मुंबई से आती है। जबकि चांदी व मेटल की राखी राजकोट से , फैंसी व डिजाइनर्स राखी कलकत्ता से आई है। इस वक्त महिलाओं के लिए कड़े वाली राखी सबसे अधिक पसंद की जा रही है जो मुंबई से आ रही है। जबकि राजस्थान के अलवार से चूड़ी में बांधने वाले लुंबे/राखी/ मंगवाए गए हैं। राखी,मिठाई,कपड़ा और गिफ्ट के लिए भी भाई बहन आनलाइन मार्केट पर अधिक विश्ववास जता रहे हैं। लोग आनलाइन मनपसंद गिफ्ट का चुनाव कर रहे हैं। आनलाइन खरीद पर आफर मिलने से कीमत भी घट जाती है। यदि मनपसंद मंगवाई गई वस्तु में कोई गड़बड़ी है तो वह वापस की जा सकती है। इसलिए लोग आनलाइन खरीद पर अधिक जा रहे हैं। पेठा कारोबारी श्याम सिंह का कहना है कि इस बार पेठा की मांग पिछलेबार की मुकाबले अधिक लग रही है। क्योंकि अभी से ही पेठा की मांग आने लगी है। पेठा स्वास्थ्य वर्धक होने केसाथ यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता व पाचन तंत्र के लिए बेहतर होता है। इसके साथ इसमे ंकोई मिलावट भी नहीं होती है। इसलिए लोग अब अन्य मिठाई के स्थान पर इसकी मांग अधिक कर रहे हैं।

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