Election News (ग्वालियर) वरूण शर्मा। देश-दुनिया में रहने-जीने के तरीके को बदलने से लेकर कोरोना वायरस ने इस बार मतदान की निशानी पर भी अपना असर दिखाया है इस बार उपचुनाव में पहली बार दाएं नहीं बल्कि बाएं हाथ की उंगली पर अमिट स्याही लगेगी। चुनाव आयोग का यह बदलाव इसलिए, क्यों कोरोना संक्रमण के कारण मतदाता को ग्लव्ज दिया जा रहा है, वो सीधे हाथ में पहना जाएगा। सीधे हाथ ग्लव्ज होने के कारण स्याही उसमें लगना संभव नहीं होगा। इसलिए बाएं हाथ की उंगली पर स्याही लगवाई जाएगी। वोटर पहले मतदान करेगा और फिर अमिट स्याही लगेगी। इसको लेकर चुनाव आयोग ने निर्देश जारी कर दिए हैं और सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों ने अपने अपने मतदान दलों को यह अवगत भी करा दिया है। ज्ञात रहे कि कोरोना संक्रमण के समय में होने जा रहे उपचुनाव में इस बार चुनाव आयोग का सबसे ज्यादा फोकस कोरोना संक्रमण रोकथाम की गाइड लाइन पर ही है। इसी कारण एक हजार से ज्यादा की पोलिंग किसी भी मतदान केंद्र पर नहीं रखी गई है। इसके अलावा मतदाताओं के लिए हर मतदान केंद्र पर मास्क, ग्लव्ज और सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई है। मतदान दलों को पीपीई किट और केंद्र पर थर्मल स्कैनर तक की व्यवस्था होगी । कोविड संक्रमित या

कोई ज्यादा तापमान वाला वोटर आता है, तो उसे मतदान के आखिरी घंटे में वोट डालने का अवसर मिलेगा। इसी कारण इस बार चुनाव आयोग ने मतदान के समय को एक घंटा ज्यादा रखा है।

मतदाताओं का भी भ्रम दूर

कोरोना संक्रमण के चलते इस बार मतदाताओं को भी यह भ्रम था कि मतदान केंद्र पर लगने वाली स्याही कैसे लगेगी। ग्लव्ज पहने होंगे तो स्याही के लिए शायद ग्लव्ज को उतारना होगा या फिर दूसरे हाथ पर लगेगी। अब चुनाव आयोग की ओर से स्थिति स्पष्ट होने के बाद मतदाताओं को भ्रम भी दूर हो गया है।

1962 में पहली बार लगी थी स्याही

भारत में पहली बार चुनाव 1951,52 में हुए थेऔर इन चुनाव में तब स्याही लगाने का कोई नियम नहीं आया था। इसके एक ही मतदाता की ओर से बार बार वोट डालने की शिकायतें अलग अलग जगह से मिलने लगीं तो अमिट स्याही का विकल्प सामने रखा गया। चुनाव आयोग ने नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी ऑफ इंडिया से स्याही को लेकर बात की जो पानी या अन्य तरीके से न मिट सके। इस लैब ने मैसूर पेंट एंड वार्निश कंपनी को यह स्याही बनाने का ऑर्डर दिया और 1962 में पहली बार चुनाव में स्याही का उपयोग किया गया ।

स्याही में नाइ्ट्रेट सिल्वर होता है

इस स्याही में सिल्वर नाइट्रेट मिला होता है जो इसे फोटो सेंसेटिव नेचर का बनाता है। धूप संपर्क में आते ही यह और पक्की हो जाती है। जब यह स्याही नाखून पर लगाई जाती है तो भूरे रंग की होती है,लेकिन लगाने के बाद गहरे बैंगनी रंग में बदल जाती है।

इस बार बाएं हाथ में स्याही

इस बार स्याही बाएं हाथ की उंगली में लगाई जाएगी दाएं हाथ में मतदाता ग्लव्ज पहने हुए होेग । इसलिए स्याही बाएं हाथ की उंगली पर लगाई जाएगी।

अरूण शर्मा, सुपरवाइजर,निर्वाचन शाखा

Posted By: anil.tomar

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