ग्वालियर। यदि आपने अपने मनी ऐप (ई-वॉलेट) जैसे पेटीएम, फोन पे, गूगल पे या अन्य से कोई ऑन लाइन बुकिंग की थी और कैंसल होने पर रिफंड नहीं आया। अब आप नेट पर मनी ऐप का कस्टमर केयर नंबर देखकर रिफंड के लिए बात कर रहे हैं तो सावधान रहने की जरुरत है। पिछले कुछ दिनों में इस तरह की कई घटनाएं हुई है। जिसमें नेट से फर्जी कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क कर लोग ठगी का शिकार होते हैं।

आपके ठगों के नंबर पर कॉल करने के बाद कस्टमर केयर बनकर ठग कॉल करते हैं आप को रिफंड की प्रोसेस कराते-कराते आपका अकाउंट साफ कर देते हैं। बीते 10 दिन में ग्वालियर में इस तरह के दो मामले सामने आए हैं।

इस तरह करते हैं ठगी

सायबर क्राइम करने वाले पहले ओटीपी पूछकर ठगी करते थे, लेकिन जब लोग जागरुक होने लगे तो ठगों ने यह नया रास्ता निकाला है। हर दूसरा व्यक्ति ट्रेन, प्लेन व अन्य तरह के टिकट ऑन लाइन बुक कर रहा है। ऐसे में जब बुकिंग कैंसल करते हैं तो कई बार पैमेंट आने में समय लग जाता है। ऐसे में जब उपभोक्ता ई-वॉलेट के कस्टमर केयर का नंबर नेट पर तलाश करता है तो ठगों द्वारा अपलोड किए फेक नंबर उसे मिलते हैं। जिस पर वह कॉल करता है तो रिफंड करने के नाम पर उसकी डिटेल व अन्य जानकारी लेकर खाते से कैश उड़ा देते हैं।

यह मामले आए सामने

केस-1

थाटीपुर के सुरेश नगर निवासी एसपीएस सेंगर केन्द्रीय भंडार में कर्मचारी है। कुछ समय पहले उन्होंने केरला जाने के लिए केरला एक्सप्रेस ट्रेन से रिजर्वेशन कराया था। पर ट्रेन रद होने पर उन्होंने पेटीएम से रिफंड में देरी होने पर गूगल पर कस्टमर केयर का नंबर लिया। जो नंबर मिला उस पर कॉल किया। रिटर्न कॉल आया। कॉल करने वाले ने रिफंड के लिए एक नया एप डाउन लोड कराया। जिसके बाद उसने कुछ डिटेल मांगी। इसके बाद ओटीपी पूछा और 81 हजार रुपए खाते से ठग लिए। थाटीपुर थाने में मामला दर्ज है।

केस-2

पड़ाव गांधी नगर निवासी रमेश कुमार ने ऑन लाइन कपड़े बुक किए थे। बाद में कैंसल कर दिए, लेकिन उनका रिफंड नहीं मिला। इस पर उन्होंने नेट पर ई-वॉलेट कंपनी का नेट से कस्टमर केयर नंबर हासिल किया। कॉल किया तो उनको रिफंड कराने के लिए एक प्रोसेस करने के लिए कहा। पहले 10 रुपए का ट्रांजेक्शन कराया। जिससे रिफंड का अकाउंट खुल जाए। इसके बाद डिटेल पूछकर खाते से 30 हजार रुपए साफ कर दिए।

सावधानी ही बचाव

इस तरह की ठगी करने वाले बेहद शातिर होते हैं। पुलिस की सायबर टीमें उनके पीछे लगी है। पर कोई भी ट्रांजेक्शन करते समय सावधान रहें यही सबसे बड़ा बचाव है। अपनी डिटेल कहीं शेयर न करें।

-नवनीत भसीन, एसपी