विजय सिंह राठाैर, ग्वालियर नईदुनिया। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा एक हजार रुपये से कम मूल्य के कपड़ों एवं जूतों पर जीएसटी की दर 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत की जा रही है। 1 जनवरी 2022 से नये दाम होंगे। ऐसे में गरीब एवं निम्न मध्यमवर्गीय लोगों के लिए बदन ढंकना व पैर में जूता पहनना भी महंगा हो जाएगा। जूता-चप्पल, शर्ट, साड़ी आदि परिधानों की कीमतें भी एक मुश्त बढ़ जाएगी। जिसके कारण कहीं न कहीं आम आदमी को परेशानी का समान करना पड़ेगा। व्यापारी वर्ग भी केंद्र के इस फैसले से काफी असंतुष्ट है। व्यापारियों का मानना है कि कोरोना के कारण बीते दो साल से व्यापार सुस्त रहा। उस पर पेट्रोल, डीजल समेत चौतरफा महंगाई की मार जनता झेल रही है। लोगों के वेतन में नाम मात्र का इजाफा बीते दो साल में हुआ है। हर साल विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पूरी करके नौकरी के लिए तैयार हो जाते हैं, मगर रोजगार नहीं हैं। बेरोजगारी बढ़ने के कारण लोगों की खरीदी की छमता घट रही है। उसपर केंद्र सरकार द्वारा कपड़े व जूते पर जीएसटी की दर बढ़ाना सही फैसला नहीं है। क्योंकि 1000 रुपये मूल्य तक के कपड़े व जूते निम्न मध्यमवर्गी व गरीब परिवारों के लोग ही पहनते हैं। उचित होगा इस इस फैसले पर सरकार पुन: विचार करे।

चैंबर आफ कामर्स बना रहा विरोध की रणनीतिः केंद्र सरकार द्वारा एक हजार रुपये से कम मूल्य के कपड़ों एवं जूतों पर जीएसटी की दर 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किया गया है। जिसके कारण व्यापारियों के साथ ही आम नागरिकों को भी काफी परेशानी का समना करना पड़ रहा है। जिसे लेकर चैंबर आफ कामर्स विरोध पर उतर आया है। चैंबर अध्यक्ष विजय गोयल, संयुक्त अध्यक्ष प्रशांत गंगवाल एवं मानसेवी सचिव डा. प्रवीण अग्रवाल का कहना है कि जीएसटी की दर बढ़ाने का फैसला समझ के परे है। क्योंकि दोनों वस्तुओं आम जन की आवश्यकता की वस्तुए हैं। इस संबंध में शुक्रवार को दोपहर 3 बजे चैंबर भवन में बैठक आयोजित की गई है, जिसमें विरोध की रणनीति बनाई जाएगी। बैठक में तमाम कपड़ा व जूता व्यापारी मौजूद रहेंगे।

Posted By: vikash.pandey

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