- गर्मियों की छुट्टियां मनाने के लिए घूमने जाना चाहते हैं परिवार, नहीं मिल रहे टिकट

Tourist destination train full: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं। लोग अब सपरिवार पर्यटन स्थलों और हिल स्टेशन जाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लग रही है। गोवा, जम्मू, पुरी जैसे बड़े शहरों और धार्मिक स्थलों को जाने वाली ट्रेनें फुल चल रही हैं। इन ट्रेनों में स्लीपर से लेकर थर्ड और सेकंड एसी तक में यात्रियों को टिकट नहीं मिल पा रहे हैं। पूरे मई में अधिकतर ट्रेनों में वेटिंग या नो-रूम की स्थिति है। यात्री आरक्षण कराने के लिए स्टेशन पहुंचते हैं, लेकिन वेटिंग या नो-रूम देखकर लौट आते हैं।

गर्मी के दिनों में लोग अपने परिवार के साथ छुट्टी बिताने के लिए बाहर जाना पसंद करते हैं, लेकिन पिछले दो साल से कोरोना के कारण ट्रेन बंद होने की वजह से लोग बाहर नहीं निकल पाए थे। घरों में रहकर बच्चे, युवा, बुजुर्ग सभी परेशान हो गए हैं। इस वर्ष कोरोना संक्रमण की स्थिति काबू में है और पाबंदियां भी नहीं हैं। इसके चलते लोगों ने सपरिवार बाहर जाने की योजना बना ली है। स्कूलों में भी गर्मी की छुट्टियां लग चुकी हैं और तीर्थ यात्रा का सफर भी शुरू हो गया है। इसके साथ ही विवाह सीजन होने के कारण ट्रेन में यात्रा करने वाले लोगों की संख्या बढ़ गई है। यात्री बढ़ने के कारण प्रीमियम ट्रेनों के अलावा, सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों में कंफर्म टिकट की जहां मांग बढ़ गई है, वहीं कई ट्रेनों में यात्रियों को टिकट ही नहीं मिल रहे हैं। आइआरसीटीसी की वेबसाइट पर जम्मू, गोवा व पुरी इलाकों के पर्यटन स्थलों के लिए पूरे मई में रोज चलने वाली ट्रेनों में किसी भी श्रेणी में टिकट उपलब्ध नहीं हैं। अधिकतर ट्रेनों में सभी श्रेणियों में या तो वेटिंग 50 से अधिक है या फिर नो-रूम यानी वेटिंग टिकट भी मौजूद नहीं हैं।

टैक्सी के किराये से बढ़ा बोझा: दूरदराज के स्टेशनों के लिए ट्रेनों में सीट न मिलने की स्थिति में लोग नजदीकी पर्यटन स्थलों का रुख कर रहे हैं, लेकिन यहां भी टैक्सी का किराया उनकी जेब पर बोझ डाल रहा है। लोग ग्वालियर से शिमला, हिमाचल, उत्तराखंड जाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन पेट्रोल-डीजल व सीएनजी के दाम बढ़ने के कारण टैक्सी का किराया भी महंगा हो गया है। चार सीटर टैक्सी जो पहले आठ रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से मिलती थी, उसका किराया अब 10 रुपये प्रति किलोमीटर हो गया है। इसी प्रकार सात सीटर गाड़ियों का किराया 12 से 13 रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच गया है।

सबसे ज्यादा आरक्षण स्लीपर और थर्ड एसी में

हिल स्टेशन, पर्यटन स्थलों और धार्मिक स्थानों पर जाने वाली सभी ट्रेनों में लोगों ने पहले से ही आरक्षण करा रखे थे। बढ़ते हुए रेल किराये को देखते हुए अधिकतर लोगों ने स्लीपर और थर्ड एसी श्रेणी में टिकट करा लिए। इसका नतीजा यह है कि छुट्टियां शुरू होने के बाद अब इन दोनों ही श्रेणियों में नो-रूम हो चुका है। सेकंड एसी में भी वेटिंग की स्थिति बहुत अधिक है। ग्वालियर से जम्मू जाने वाली झेलम एक्सप्रेस के थर्ड एसी व स्लीपर कोच में 25 मई तक नो-रूम है। सेकंड एसी की वेटिंग भी औसतन 20 के लगभग चल रही है।

एक नजर ट्रेनों की स्थिति पर

1ग्वालियर से जम्मू झेलम एक्सप्रेस-25 मई तक थर्ड एसी और स्लीपर में नो-रूम।

- मालवा एक्सप्रेस-25 मई तक स्लीपर में 41 और थर्ड एसी में 14 वेटिंग।

- दुर्ग-जम्मूतवी एक्सप्रेस-25 मई तक स्लीपर में 68, थर्ड एसी में 29 वेटिंग।

- तिरुनेलवल्ली-श्रीमाता वैष्णो देवी धाम-25 मई तक स्लीपर व थर्ड एसी में नो-रूम।

- दुर्ग-ऊधमपुर एक्सप्रेस-25 मई तक स्लीपर में 28 व थर्ड एसी में 27 वेटिंग।

- हिमसागर एक्सप्रेस-25 मई तक स्लीपर में 37 और थर्ड एसी में नो-रूम।

- जबलपुर-श्रीमाता वैष्णो देवी धाम-25 मई तक स्लीपर में 67 और थर्ड एसी में 23 वेटिंग।

2. ग्वालियर से मडगांव (गोवा) मंगला एक्सप्रेस-25 मई तक स्लीपर में 12 और थर्ड एसी में छह वेटिंग।

गोवा एक्सप्रेस-25 मई तक स्लीपर में 89 और थर्ड एसी में 63 वेटिंग।

3. ग्वालियर से पुरी़उित्कल कलिंगा एक्सप्रेस-25 मई तक स्लीपर में 57 व थर्ड एसी में 32 वेटिंग।

Posted By: anil.tomar

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