- फर्जी फाइलें तैयार कर किया रहा था घोटाला

ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। नगर निगम के जल प्रदाय विभाग में हुए घोटाले के आरोपितों के केस पर विशेष सत्र न्यायालय 29 नवंबर को अपना फैसला सुनाएगा। तत्कालीन निगम आयुक्त विवेक सिंह सहित 11 आरोपितों की किस्मत का फैसला है। जेल जाएंगे या दोषमुक्त हो जाएंगी, इसक पर कोर्ट अपना फैसला देगा। 23 नवंबर को बचाव पक्ष के बयान दर्ज होने के बाद कोर्ट ने फैसले की 29 नवंबर तारीख निर्धारित की थी।

नगर निगम के जलप्रदाय विभाग में वर्ष 2004 में 1200 फाइलें तैयार की गई थीं। इन फाइलोें में छोटे-छोटे भुगतान की तैयारी थी। ऐसे भुगतान किए जा रहे थे, जिनका काम मौके पर नहीं था। कुछ फाइलों में भुगतान हो गया था। जब इस मामले की शिकायत लोकायुक्त पुलिस के पास की गई तो मामले की जांच की गई। 12 फाइलों की जांच की गई। जांच में पाया कि फर्जी तरीके से भुगतान किए जा रहे हैं। बड़ा भ्रष्टाचार किया गया है। लोकायुक्त ने लंबे समय तक जांच की। इसमें तत्कालीन आयुक्त विवेक सिंह सहित अन्य अधिकारियों को आरोपित बनाया। लोकायुक्त ने जांच के बाद विशेष न्यायालय में 2016 में चालान पेश किया। आरोपितों ने लोकायुक्त की जांच को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने यह कहते हुए याचिकाओं को निराकरण कर दिया कि मामले की शीघ्र ट्रायल खत्म की जाए। हाई कोर्ट के आदेश पर इस मामले की ट्रायल लगातार जारी है। सभी गवाह हो चुके हैं। तत्कालानी नगर निगम आयुक्त विवेक सिंह ने अपने बचाव में कहा था कि उन्हें आइएएस अवार्ड होना था, लेकिन उसे रोकने के लिए विशेष स्थापना पुलिस ने आरोपित बनाया है। उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। राजनैतिक दवाब में आकर एफआइआर दर्ज की गई है।

Posted By: anil.tomar

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