ग्वालियर। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने एक परिवार बिखरने से बचाने सुलह की आखिरी कोशिश की है। कोर्ट ने पति को पत्नी के मायके में 7 दिन रहने का आदेश दिया है। इसके बाद दोनों को अपना फैसला कोर्ट को आकर बताना है। कोर्ट ने यह आदेश पति की उस याचिका पर दिया है, जिसमें पत्नी की ओर से दर्ज कराई गई घरेलू हिंसा की एफआईआर को निरस्त कराने की मांग की थी।

असिरुद्दीन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर तर्क दिया है कि उसकी पत्नी आसमा ने दतिया थाने में घरेलू हिंसा का झूठा केस दर्ज कराया है। जबकि वह पत्नी से 6 साल से अलग रह रहा है। घरेलू हिंसा की एफआईआर को निरस्त किया जाए। उसके बाद कोर्ट ने पति-पत्नी को बुलाया। दोनों का पक्ष सुना। पत्नी का कहना था कि पति कुछ नहीं कमाता है। इस वजह से इसके साथ जीवन गुजारना मुश्किल है। जबकि पति का कहना था कि पत्नी रोज झगड़ा करती थी। इस कारण अलग रह रहा है। कोर्ट के समक्ष दोनों ने एक साथ रहने से इनकार कर दिया। वहीं पत्नी ने पति के साथ जाने से इनकार कर दिया। दोनों का पक्ष सुनने के बाद फैसला सुनाया।

अक्सर घरेलू हिंसा के मामलों में पत्नी पति के घर रहने जाती है, लेकिन इस केस में कोर्ट ने पति को पत्नी के मायके में सात दिन रहने का आदेश दिया है। सात दिन बाद इस केस की फिर से सुनवाई की जाएगी। दोनों को कोर्ट में उपस्थित होकर अपनी-अपनी राय देनी होगी। असिरुद्दीन व आसमा का निकाह 2010 में हुआ था। शादी के दो साल बाद से अलग रह रहे हैं।

Posted By:

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस