वीरेंद्र तिवारी, ग्वालियर नईदुनिया। तानसेन समारोह के नजदीक आते ही मीडियाकर्मियों और कला संस्कृति विभाग से जुड़े अफसरों के मोबाइल में जो सबसे ज्यादा मैसेज देखे जाते हैं, वह हैं सरोद वादक अमजद अली खान साहब के। ग्वालियर में उनके द्वारा वालिद हाफिज अली खान की याद में बनाया गए सरोद घर देखने आज संघ प्रमुख मोहन भागवत भी जाएंगे, इसलिए खान साहब भी आए हुए हैं। खान साब का दुख है कि मप्र का संस्कृति विभाग उन्हें तानसेन समारोह में प्रस्तुति देने आमंत्रित ही नहीं करता। हालांकि मैंने जब समारोह से जुड़े लोगों से कारण पूछा तो पता चला खान साब की शर्त रहती है कि उनके बच्चों की भी प्रस्तुति समारोह के मंच से कराई जाए जो कि मेरिट के हिसाब से संभव नहीं। जब विभाग शर्त नहीं मानता तो वह खुद भी न्योता स्वीकार नहीं करते। यानी दिल भी जिद किए बैठा है एक बच्चे सी, या तो इसे सबकुछ चाहिए या कुछ भी नहीं।

क्या ग्वालियर साफ होगाः हाल ही में जारी स्वच्छता रैंकिंग में दो अंक पिछड़ने पर शहर की जो किरकिरी होनी थी, वह हो चुकी है। नईदुनिया ने स्वच्छता विषय पर पहली बार संवाद कराया। विषय था 'हमारा शहर इंदौर जैसा स्वच्छ क्यों नहीं"। कार्यक्रम में नेताओं ने अफसरों को,अफसरों ने जनता और जनता ने नेता-अफसर दोनों को गंदगी के लिए खूब कोसा। आखिरकार तय हुआ कि बीती ताहि बिसार दें,अब आगे की सुध लें...। तीन माह बाद फिर से स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 की रैंकिंग होना है, लेकिन सफाई व्यवस्था कैसे पटरी पर आए यह अभी भी बड़ा सवाल बना हुआ है। इस पूरे मामले में संभागायुक्त पांच जिलों की टेंशन के साथ साथ शहर की सफाई कराने के लिए किला लड़ाते दिखाई दे रहे हैं। गारबेज फ्री सिटी का अवार्ड लेकर लौटे निगम अफसर शहर से कचरा उठवाने कब से उतरेंगे यह इंतजार है।

मामा बोले- माफिया अखबार निकालने लगेः एक अखबार के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए शनिवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डम-डम डिगा डिगा टाइप के उन अखबारों पर निशाना साधा, जो सिर्फ काला-पीला छिपाने के लिए ही निकाले जाते हैं। बकौल सीएम - आज कल तो यह चल रहा है कि रेत माफिया,खनन माफिया सबसे पहले अखबार निकालना शुरू कर देता है, जिससे उनके काले कारनामें बचे रहें।

सीएम साब की इस बात पर मैं टिप्पणी तो नहीं करूंगा, लेकिन मैं उनसे ही पूछता हूं कि जब आपको सब पता है तो आपकी जांच एजेंसियों ने ऐसे कितने अखबारों की आड़ में चल रहे धंधों पर कार्रवाई की है। मुझे याद पड़ रहा है कि इंदौर में कोरोना काल के दौरान आपके ही अफसरों ने लाकडाउन के दौरान एक व्यवसायी को करोड़ों रुपये का गुटखा ट्रांसपोर्टेशन की छूट दी थी। जांच करा लें क्या सिर्फ अखबार का डर दिखाकर ही अनुमति मिल गई थी?

हमने घबराना नहीं हैः इस कोरोना की क्या कहें। या तो ढंग से चला ही जाए या बना ही रहे, कम से कम उसके साथ जीना तो सीख लें। आखिर हम दुनिया जहान की घातक बीमारियों के साथ जीना सीख ही चुके हैं ना । जब भी चीजें अच्छी होना शुरू होती है किसी न किसी नये वेरियंट की खबर हमें पीछे ढकेल देती है। अब देखो भारत से कई देशों के लिए कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू करने की जैसे ही शुभ घोषणा हुई अगले दिन बड़ी-बड़ी खबरें मिली कि अफ्रीका में कोरोना वायरस का नया वेरियंट आ गया है, जो पहले वाले से तीस गुना तेज है,वैक्सीन काम नहीं कर रही सो अलग । खाली बैठे डब्ल्यूएचओ ने भी इसे चिंता का विषय बता दिया। अब फिर से सरकार पशोपेश में है कि उड़ानें शुरू करें कि नहीं। खैर अति का अंत होता है इस वायरस का भी होगा। बस हमने घबराना नहीं है।

Posted By: vikash.pandey

NaiDunia Local
NaiDunia Local