ग्वालियर। सीबीआई ने प्रीपीजी फर्जीवाड़े के हाई प्रोफाइल केस में चालान पेश कर दिया है। इस मामले में एसआईटी ने जिन लोगों को आरोपी बनाया था, उन्हें 4 साल की जांच के बाद क्लीन चिट दे दी है।

व्यापमं के पूर्व कंट्रोलर डॉ.पंकज त्रिवेदी, पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य गुलाब सिंह किरार, कैंसर हॉस्पिटल के संचालक डॉ.बीआर श्रीवास्तव सहित 9 लोगों को आरोप मुक्त कर दिया। इनके खिलाफ सीबीआई ने तर्क दिया है कि साक्ष्य नहीं मिले, जिसके आधार पर उन्हें आरोपी बनाया जा सके।

आरटीआई कार्यकर्ता आशीष चतुर्वेदी ने जुलाई 2014 में एसआईटी के पास शिकायत की थी। जांच के बाद झांसी रोड थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इस मामले में खुलासा हुआ कि परीक्षार्थियों ने प्री पीजी पास करने के लिए 50 लाख रुपए से अधिक की दलाली दी है।

इस केस में हाई प्रोफाइल लोगों के नाम सामने आए, जिन्होंने अपने बच्चों के एडमिशन के लिए व्यापमं के अधिकारी व दलालों को पैसे दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच सीबीआई ने शुरू की। वर्ष 2015 में यह केस सीबीआई को हैंडओवर हो गया।

4 साल इस मामले की जांच की और कोर्ट में बीते दिनों चालान पेश कर दिया। सीबीआई ने 9 आरोपियों को क्लीन चिट दे दी। ज्ञात हो कि सीबीआई पूर्व में भी कुछ आरोपियों के खिलाफ चालान पेश कर चुकी है, जिसमें आरोपियों को क्लीन चिट दी गई है। इससे सीबीआई की जांच पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

ऐेसे किया गया था फर्जीवाड़ा

  • आरोपियों ने प्री पीजी पास करने के लिए 50 लाख से अधिक की दलाली दी थी। आरोपी परीक्षा में बैठे थे, लेकिन उन्होंने ओएमआर शीट में कुछ ही गोले भरे थे और शेष खाली छोड़ दिए थे। इसके बाद व्यापमं से आरोपियों ने ओएमआर शीट निकालकर सभी गोले भरे। आरोपियों ने प्री पीजी में टॉप किया। इसमें फर्जीवाड़े में व्यापमं के अधिकारी भी शामिल थे।
  • एसआईटी से केस सीबीआई को स्थानांतरित हुआ था, उस वक्त एपीडीएमसी के पूर्व कोषाध्यक्ष डॉ. योगेश उपरीत जेल में बंद थे, लेकिन सीबीआई चालान पेश नहीं कर पाई थी। इस कारण उन्हें जमानत मिल गई थी।
  • एसआईटी ने इस केस में 34 आरोपी बनाए थे, लेकिन 9 को क्लीन चिट मिलने से 24 आरोपी ही अब इस केस में रह गए हैं।
  • सीबीआई ने जांच में कोई नया खुलासा नहीं किया है। इस केस में सभी तथ्य एसआईटी ने सामने ला दिए थे। सीबीआई ने चालान में दस्तावेज पूरे पेश किए हैं।

सीबीआई ने इन्हें दी क्लीन चिट

सुधीर भदौरिया, डॉ.पंकज त्रिवेदी, रश्मि परिहार, वीर बहादुर सिंह भदौरिया, डॉ. गुलाब सिंह किरार, डॉ.बीआर श्रीवास्तव, सीके मिश्रा, शुभी सिंह भदौरिया के खिलाफ साक्ष्य न होने के अभाव में क्लीन चिट दी गई है, जबकि रमेश चन्द्र वर्मा को मृत होने की वजह से केस से बाहर किया गया। सीबीआई ने पिताओं को क्लीन चिट देने के पीछे तर्क दिया है कि दलाल को पैसे देने के लिए कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं।

इनके खिलाफ पेश किया है चालान

शक्ति प्रताप सिंह किरार (फरार घोषित), विशाल यादव, रोहित जैन, राजेन्द्र जैन, जगदीश सगर, अतुल शर्मा, अमित शर्मा, बृजमोहन शंखवार, राम गोलापल शर्मा, वीरेन्द्र पाटीदार, राजेश पाटीदार, शरद यादव, अंकित शर्मा, विपिन शर्मा, गौरव भदौरिया, डॉ.रिचा जौहरी, डॉ.योगेश उपरीत, डॉ.नितिन महिन्द्रा, आकांक्षा चौहान, राहुल जैन, अंकित वर्मा, अनिल कुमार वर्मा, डॉ.मुकेश स्वरूप जौहरी (डॉ.एमएस जौहरी), डॉ.नवीन शर्मा के खिलाफ चालान पेश किया गया है।

चालान पेश करते वक्त शक्ति प्रताप सिंह किरार उपस्थित नहीं हुए। इस कारण उन्हें फरार घोषित किया गया है। शक्ति सिंह ने गिरफ्तारी वारंट को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जिस पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित किया है। शक्ति सिंह किरार ने दलाल को पैसे देकर प्री पीजी में वर्ष 2011 में पहली रैंक हासिल की थी।

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