मनीष शर्मा, ग्वालियर नईदुनिया। 17 मई से ज्येष्ठ माह की शुरुआत हो चुकी है। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार ये साल का तीसरा माह होता है। जिसका स्वामी मंगल है। माह के आखिरी दिन पूर्णिमा तिथि के साथ ज्येष्ठा नक्षत्र का संयोग होने से इस माह को ज्येष्ठ माह कहा जाता है। इस माह में सूर्य अधिक ताकतवर होता है, इसलिए भयंकर गर्मी होती है। इस पूरे माह जल दान अवश्य करना चाहिए। साथ ही प्यासे लोगों को पानी भी पिलाना चाहिए। सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। साथ ही इस माह तिल का दान करना बहुत ही फलदायी माना गया है। ऐसा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और स्वास्थ्य सुख मिलता है। इस माह के स्वामी मंगल हैं। इसलिए इन दिनों हनुमानजी की पूजा का विशेष महत्व है। इस पूरे माह हनुमानजी की पूजा करने से हर तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं।

जानें क्या है वरुण दोष: ज्येष्ठ माह में जल व्यर्थ करने से बचना चाहिए। पौराणिक मान्यता अनुसार अगर कोई व्यक्ति इस माह व्यर्थ जल काे बर्बात करता है तो उसे ऐसा करने से वरुण दोष लगता है। अगर आपकी कुंडली मे मंगल दोष है या मंगल कमजोर है तो इस पूरे माह हनुमानजी की विधि विधान से पूजा करना चाहिए, जिससे मंगल ग्रह मजबूत होकर शुभ फल देते हैं।

एक समय भोजन करने का नियम: ज्येष्ठ माह में संभव हो तो एक समय भोजन करना चाहिए। महाभारत के अनुशासन पर्व में लिखा है कि "ज्येष्ठामूलं तु यो मासमेकभक्तेन संक्षिपेत्। ऐश्वर्यमतुलं श्रेष्ठं पुमान्स्त्री वा प्रपद्यते।।” अर्थात ज्येष्ठ माह में जो व्यक्ति एक समय भोजन करता है, वह स्वस्थ रहकर धनवान होता है। इस माह बैगन नही खाना चाहिए। जिनके जेष्ठ संतान जीवित हों, उन्हें बैगन खाने से बचना चाहिए। ज्येष्ठ माह में बैगन खाना संतान के लिए शुभ नहीं माना जाता है। इस माह में लाल मिर्च का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही इस माह में ज्यादा मसालेदार भोजन को भी निषेध माना गया है।

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Posted By: vikash.pandey

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