ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सड़क बनाने के साथ ही पानी की बचत करने का अनूठा उदाहरण पीडब्ल्यूडी ने ग्वालियर में शिवपुरी लिंक रोड पर दिया था। यहां वॉटर हार्वेस्टिंग के कारण पूरे क्षेत्र का वॉटर लेवल बढ़ गया था, लेकिन अमृत योजना में अधिकारियों की अनदेखी के कारण ठेकेदार ने वॉटर हार्वेस्टिंग के लिए लगाए पाइपों को तोड़ दिया। इसके कारण बारिश का पानी सड़क से बहकर जमीन में जाने की वजह नालों में बहकर बर्बाद हो रहा है। वहीं अब ठेकेदार पाइप जोड़ने के लिए अलग से पैसा मांग रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अमृत योजना के कार्यों में पाइप को जोड़ने के लिए अलग से पैसों का प्रावधान नहीं है इसलिए पाइप नहीं जोड़ सकेंगे।

पीडब्ल्यूडी ने 110 करोड़ की लागत से 16 किलोमीटर लंबी शिवपुरी लिंक रोड का निर्माण कार्य किया था। सड़क निर्माण के दौरान ही पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने पानी को सहेजने के लिए पहली बार सड़क पर वॉटर हार्वेस्टिंग की योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने इस सड़क पर जनभागीदारी और स्वयं के पैसों से 40 वॉटर हार्वेस्टिंग की किट लगाई थीं। इन किटों के माध्यम से सड़क पर गिरने वाली बारिश की हर बूंद को वॉटर हार्वेस्टिंग के जरिए जमीन के अंदर पहुंचाया जाता था। लेकिन अमृत योजना के तहत सीवर लाइन डालने के लिए सड़क किनारे खुदाई की गई।

इस खुदाई के दौरान अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया और ठेकेदार ने वॉटर हार्वेस्टिंग के सभी पाइपों को तोड़ दिया। जबकि पाइप तोड़ने के बाद महज एक 10 फीट का पाइप लगाने से वॉटर हार्वेस्टिंग फिर से कार्य प्रारंभ कर देती। लेकिन अधिकारियों ने पाइप लगाने की जगह वहां पर मिट्टी भरकर वॉटर हार्वेस्टिंग को खत्म ही कर दिया।

40 लाख में कराई थी वॉटर हार्वेस्टिंग

पीडब्ल्यूडी ने शिवपुरी लिंक रोड पर स्कूल संचालकों, वाहन डीलर एवं स्वयं के अधिकारियों से पैसे एकत्रित कर यह वॉटर हार्वेस्टिंग कराई थी। साथ ही जिस अधिकारी ने वॉटर हार्वेस्टिंग के लिए पैसे दिए थे उसके नाम का बोर्ड भी लगाया गया था।

देश में बनी थी मिसाल

देश में पहली बार ऐसा हुआ था कि सड़क पर वॉटर हार्वेस्टिंग की गई हो, लेकिन यह प्रयोग सफल होने के बाद इसे शिवपुरी-गुना राष्ट्रीय राज्यमार्ग पर अपनाया गया। साथ ही राजस्थान में भी यह प्रारंभ कर दिया गया था।

इनका कहना है

ठेकेदार के साथ एग्रीमेंट में कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं है कि वॉटर हार्वेस्टिंग का पाइप टूटने पर उसे नया डाला जाएगा। ठेकेदार अपनी जेब से तो लगाएगा नहीं। अब आयुक्त से इस मामले में बात करनी होगी। अलग से प्रावधान करना होगा तभी पाइप डाले जा सकेंगे।

रामु शुक्ला, कार्यपालन अधिकारी, अमृत योजना