ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शहर की सबसे पाश कालोनियों में शुमार बसंत विहार, पटेल नगर, सरस्वती नगर और गोविंदपुरी जैसे इलाकों में भी स्ट्रीट लाइटें धूप-छांव का खेल खेल रही हैं। इन इलाकों में स्ट्रीट लाइटें लगा तो दी गई हैं, लेकिन ये जल रही हैं या बंद हैं, इसकी सुध कोई नहीं ले रहा है।

इन कालोनियों में कुछ स्ट्रीट लाइटें जल रही हैं तो कुछ बंद हैं। कुछ ऐसी भी हैं जो जल-बुझकर डीजे लाइट जैसा अनुभव दे रही हैं। इसके अलावा इन कालोनियों के अंदर सड़कों पर मौजूद गढ्डों के कारण लोगों का आवागमन भी प्रभावित हो रहा है। हालांकि अफसरों का दावा है कि आगामी एक सप्ताह में स्ट्रीट लाइट की समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन सड़कों के गढ्डे बरसात के मौसम के बाद ही भर पाएंगे। नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अफसरों द्वारा दबाव डालने पर इइएसएल कंपनी के राज्य प्रमुख वेदप्रकाश डिंडोरे ने शनिवार की रात खुद अलग-अलग इलाकों में घूमकर स्ट्रीट लाइटों को देखा। उन्हें भी कई इलाकों में स्ट्रीट लाइटें बंद मिली हैं। हालांकि उनका दावा है कि 96 से 97 प्रतिशत लाइटें चालू हैं, लेकिन यह स्थिति सिर्फ मुख्य मार्गों की है। गली-मोहल्लों में अब भी ये लाइटें बंद नजर आ रही हैं।

जो सबसे पाश इलाके वहां समस्या सर्वाधिक

नगर निगम, स्मार्ट सिटी और इइएसएल अफसरों की बैठक में यह तथ्य निकलकर सामने आया है कि स्ट्रीट लाइटों की यह समस्या सबसे अधिक ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में है। ये वही विधानसभा क्षेत्र है, जिसमें सबसे अधिक पाश इलाके शामिल हैं। इनमें बसंत विहार, माधव नगर, चेतकपुरी, हरिशंकरपुरम, सिटी सेंटर, न्यू सिटी सेंटर, सिटी सेंटर एक्सटेंशन, गोविंदपुरी, पटेल नगर, सरस्वती नगर, अनुपम नगर जैसे तीन दर्जन से अधिक कालोनियां शामिल हैं। इन कालोनियों में रहने वाले लोग ही नगर निगम को सबसे अधिक संपत्ति कर, जल कर से लेकर इनकम टैक्स तक अदा करते हैं।

ये मिली सड़कों पर स्थिति

- बसंत विहार : इस पाश कालोनी में अधिकतर मकान दो हजार वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल में बने हुए हैं। इस कालोनी में शहर के प्रबुद्घ नागरिक निवास करते हैं, जिनमें अधिकतर डाक्टर व व्यवसायी हैं। कालोनी के सी और डी ब्लाक में रात के समय अंधेरा पसरा हुआ है, क्योंकि यहां स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हुई हैं।

- एसबीआई रीजनल आफिस से पटेल नगर रोड : इस मार्ग पर सिर्फ स्टेट बैंक के बाहर ही एक खंबे पर दो लाइटें लगी हैं, लेकिन इनमें से एक लाइट जल-बुझ रही है। बाकी पूरे मार्ग पर स्थानीय होटल संचालकों व व्यवसायियों ने अपनी ओर से सड़क को रोशन करने के लिए लाइटें लगा रखी हैं। इस व्यस्त मार्ग पर स्मार्ट सिटी ने लाइटें ही नहीं लगवाईं।

- पटेल नगर रोड : इस मार्ग पर स्मार्ट सिटी ने सड़क के एक ओर ही लाइटें लगवाई हैं। इनमें भी कई लाइटें जल-बुझ रही हैं। इइएसएल के अफसर इसके पीछे बिजली की अधोसंरचना को दोषी बताते हुए अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। दूसरी ओर इस मार्ग पर रोड के बीचोंबीच बने सीवर चेंबरों के कारण वाहन हिचकोले खाते हुए निकलते हैं।

- सरस्वती नगर : पटेल नगर से थोड़ा आगे बढ़ने पर सरस्वती नगर में भी यही हालात बने हुए हैं। यहां भी कुछ लाइटें बंद हैं और कुछ चालू। इसके चलते कुछ हिस्से में रोशनी है, तो कुछ हिस्से में घुप अंधेरा पसरा हुआ है। इससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

गोविंदपुरी रोड : इस मार्ग पर कुलपति बंगले से लेकर गांधी रोड के मोड़ तक स्मार्ट एलइडी लगाई गई हैं, लेकिन यहां भी लाइटें टुकड़ों में जल रही हैं। किशोर अनुरक्षण गृह के सामने लाइटें बंद पड़ी हुई हैं। इसके अलावा सिल्वर एस्टेट से थोड़ा आगे चलने पर लाइन से पांच खंबों पर लाइटें बंद हैं। इससे 200 मीटर के टुकड़ें में अंधेरा पसरा हुआ है।

इइएसएल व स्मार्ट सिटी के अफसरों को शहर में रात के समय घूमकर स्ट्रीट लाइटों की स्थिति देखने और बंद मिलने पर तुरंत ही ठीक कराने के लिए कहा गया है। हमने साफ कहा है कि तकनीकी समस्याओं को दूर कर स्ट्रीट लाइटें शुरू की जाएं।

किशोर कान्याल, निगमायुक्त

हमारी टीम रात के समय शहर के विभिन्न इलाकों में घूमकर लाइटें देख रही हैं। मैंने स्वयं शहर में कई स्थानों पर लाइटें देखी हैं। हमारी लगभग 96 प्रतिशत लाइटें चालू हैं। जो लाइटें बंद हैं, उन्हें चालू कराया जा रहा है।

वेदप्रकाश डिंडोरे राज्य प्रमुख इइएसएल

Posted By: anil tomar

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