Winter Rain in Gwalior: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।जम्मू कश्मीर में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ से बुधवार को शहर का मौसम बदल गया। सुबह झमाझम वर्षा से शहर तर हो गया। रुक-रुक वर्षा जारी रही। 13 मिली वर्षा दर्ज हुई। फसलों के लिए अमृत वर्षा हुई। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार सवा गुना उत्पादन की संभावना है। दिन में बादल व कोहरा भी छाया रहा, जिससे दिनभर लोगों को सूरज के दर्शन नहीं हुए। दिन व रात का मौसम एक रहा। न्यूनतम व अधिकत तापमान में महज 2.7 डिग्री सेल्सियस (डिसे) का अंतर रहा। अधिकतम तापमान सामान्य से 5.7 डिसे कम रहा। इससे दिन शीतल रहा। मौसम विभाग के अनुसार 26 जनवरी को घना कोहरा व बादल छाए रहेंगे। आसमान साफ होने से ठंड बढ़ेगी।

गत दिवस से शहर में बादल छाए हुए थे। रुक-रुककर बूंदाबादी हो रही थी, लेकिन सुबह अचानक मौसम बदल गया। गरज-चमक के साथ तेज वर्षा हुई। शुरुवात में छोटे आकार के ओले भी गिरे, लेकिन ओले गिरने का सिलसिला चंद सेकेंड का था। अचानक तेज वर्षा शुरू हो गई। रुक-रुककर वर्षा का दौर चला। इस वर्षा के कारण शहर की रफ्तार भी थम गई। जगह-जगह जाम की स्थिति रही। सिग्नल भी बंद रहे। वर्षा के कारण दिन में ठंड बढ़ गई। न्यूनतम तापमान सामान्य से अाठ डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।

सीवर लाइनें उफनी

-वर्षा की गति काफी तेज थी। इस कारण शहर के सीवर लाइनें उफन गई। सड़कों पर पानी भर गया। कालोनियों में भी पानी भरा रहा। वर्षा के कारण कीचड़ हो गई। धूप निकलने तक लोगों को कीचड़ का सामना करना होगा।

- मुख्य सड़कों पर भी जलभराव रहा। सड़कों पर भरे पानी को निकालने के लिए नगर निगम का अमला सीवर लाइनों को साफ करता रहा। राजमाता चौराहे पर लाइन को साफ किया।

- लोगों ने सीवर जाम शिकायतें भी नगर निगम से की।

इस कारण बदला मौसम

अफगानिस्तान-पाकिस्तान में क्षोभमंडलीय परिसंचरण तक चक्रवातीय घेरा बना हुआ है। पंजाब, पूर्वी राजस्थान व मध्य प्रदेश से होते हुए विदर्भ तक ट्रफ लाइन गुजर रही है। इस कारण ग्वालियर चंबल संभाग का मौसम बदल गया। 26 जनवरी तक जारी रहने की संभावना है।

- 28 जनवरी को नया पश्चिमी विक्षोभ आ रहा है। इसके असर से 29 से 30 जनवरी के बीच फिर से मौसम बिगड़ेगा। गरज चमक के साथ वर्षा के आसार हैं।

हर फसल का बढ़ेगा उत्पादन

-कृषि वैज्ञानिक राज सिंह कुशवाह के अनुसार यह फसलों के लिए अमृत वर्षा है। सवा गुना तक उत्पादन बढ़ेगा। फसल की पत्तियों पर धूल जम गई थी और वर्षा से हट गई है। प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया अच्छी होगी। फसल में फूल व शाखाएं अधिक निकलेंगी। बिजली की बचत हो गई। असिंचित भूमि में फसलों का उत्पादन बढ़ेगा।

- किसानों का श्रम भी बचा है। दाना अच्छा भी अच्छा पड़ेगा। हर तरह से यह वर्षा फसलों के लिए लाभदायक है।

Posted By: anil tomar

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