Work without safety in Gwalior: ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर में लगी लाइटों को ठीक करने के लिए नगर निगम के विद्युत विभाग के कर्मचारियों को कोई खास सुरक्षा उपकरण मुहैया नहीं कराए जाते हैं। इन कर्मचारियों को न तो हेलमेट मिलता है और न ही सेफ्टी बेल्ट। सुरक्षा उपकरणों के अभाव में काम करने के कारण अक्सर ये कर्मचारी हादसे का शिकार हो जाते हैं। गत मंगलवार को भी ऐसे ही एक हादसे में एक विनियमित कर्मचारी लाइन मैन लाल सिंह को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

शहर में लगी स्ट्रीट लाइट और हाईमास्ट में फाल्ट ठीक करने के लिए नगर निगम के विद्युत विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। दिन हो या रात, ये जान जोखिम में डालकर कार्य करते हैं। सुरक्षा किट की अन्य सामग्री का भी अभाव रहता है। बिना सुरक्षा उपकरण के ही लाइनमैन पोल पर चढ़कर फाल्ट ठीक करते हैं, जबकि नियमानुसार विद्युत अनुरक्षण का कार्य करने वाले आउटसोर्सिंग व संविदा कर्मचारियों को सुरक्षा किट देने का प्रावधान है। सुरक्षा किट में दस्ताने, प्लायर, सुरक्षा बेल्ट आदि देना होता है, ताकि पोल पर चढ़कर उन्हें लाइन ठीक करने में किसी प्रकार का जोखिम न हो। सामग्री खरीद की जिम्मेदारी निगम की है, लेकिन विद्युतकर्मियों को सुरक्षा किट उपलब्ध नहीं कराई गई है। वहीं नगर निगम के विद्युत विभाग के अधिकाारियों का कहना है कि लाइनमैनों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन कर्मचारी पहनते ही नहीं है। इन कर्मचारियों को नियमानुसार 18 प्रकार के सुरक्षा उपकरण दिए जाने का प्रावधान है। इसमें हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, अर्थ चेन, कटिंग प्लायर, दस्ताने, सीढ़ी, रस्सा, चैनपुली ब्लॉक, फर्स्ट ऐड बॉक्स, टेस्टर, स्पेनर सेट, वर्दी, शूज, टार्च, अर्थ राड और रेनकोट शामिल हैं। इन सुरक्षा उपकरणों की कमी का ही नतीजा रहा कि विनियमित कर्मचारी लाल सिंह हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए। अब इस हादसे के लिए नगर निगम द्वारा दो सदस्यीय जांच कमेटी का भी गठन किया जा रहा है, जो इस हादसे के कारणों की जांच करेगी।

Posted By: anil tomar

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