- एचआईबी संक्रमण फैलने का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध,रोकथाम के लिए निरोध तक नहीं

- अंचल में पिछले दस साल में मिले 6200एचआइबी पाजिटिव,1330 की मौत,बच्चे भी संक्रमण की चपेट में

World AIDS Day : अजय उपााध्याय. ग्वालियर। एचआईबी संक्रमण की रोकथाम के लिए सरकारी प्रयास शून्य हैं। अंचल में पिछले दस साल में एचआईबी संक्रमण के 6200 मरीज मिल चुके हैं। इनमें से 1330 मरीजों की मौत भी हो गई। संक्रमण फैलने का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध है। यह जानने के बाद भी जिम्मेदार स्वास्थ्य अधिकारी घनी बस्तियों से लेकर अस्पताल तक में निरोध की उपलब्धता नहीं करा सके। जबकि शासन स्तर से निरोध की उपलब्धता भरपूर मात्रा में कराई जाती है, जो स्टोर में भरे पड़े हुए हैं। लेकिन वह आमजन की पहुंच से दूर हैं। विश्व एड्स दिवस से एक दिन पहले नईदुनिया टीम ने शासन द्वारा चलाए जा रहे एड्स की रोकथाम के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं उनकी हकीकत देखी तो पाया कि निरोध की उपलब्धता तो छोड़िए, एचआइबी संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रचार प्रसार भी कहीं दिखाई नहीं दिया। जबकि विश्व एड्स दिवस एचआईबी संक्रमण की रोकथाम ,लोगों में जनजागृति फैलाने और जो लोग एचआईबी के संक्रमण से मरें है उनके लिए शोक संवेदनाएं प्रगट करना हैा।

कहां पर क्या स्थिति-

एआरटी सेंटर जेएएच: माधव डिस्पेंसरी में एड्स की जांच के लिए एआरटी सेंटर स्थित है। जहां पर मरीज की जांच से लेकर उपचार दिया जाता है। निरोध के पैकट की उपलब्धत कक्षा में एक बाक्स में की गई थी।

टीबी अस्पताल: माधव डिस्पेंसरी के समाने स्थित टीबी अस्पताल में एचआईबी की जांच की सुविधा उपलब्ध है। हर टीबी मरीज की एड्स की जांच की जाती है। लेकिन यहां पर निरोध की उपलब्धता नहीं रहती। नोडल अधिकारी रवि कुशवाह का कहना है कि यहां पर केवल टीबी की दवा मिलती निरोध नहीं।

जिला अस्पताल: जिला अस्पताल में भी एड्स की जांच की उपलब्धता है पर अस्पताल में निरोध का बाक्स कहीं पर रखा दिखाई नहीं दिया। आरएमओ का कहना था दवा स्टोर पर निरोध उपलब्ध है।

सिविल अस्पताल हजीरा: यहां पर बने एआरटी सेंटर में एक काउंसलर मौजूद है, कक्ष के अंदर ही निरोध रखे हुए थे। अस्पताल प्रभारी का कहना कि निरोध के लिए बाक्स लगा रखा है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंन्द्र: पंथनगर, एजी आफिस, कलेक्ट्रेट आदि में एचआईबी संक्रमण की रोकथाम के लिए निरोध के पैकट मौजूद नहीं थे।

नोट: एड्स की रोकथाम के घनी बस्तियों में निशुल्क निरोध का वितरण,अस्पताल में अलग से निरोध से भरे बाक्स लगाने थे। इसके साथ ही हाइवे पर ढावे पर भी इनकी उपलब्धता होनी चाहिए थी।

60फीसद एचआईबी संक्रमितों में मिलती टीबी की शिकायत-

एआरटी सेंटर के नोडल अधिकारी डा राकेश गहिरबार का कहना है कि देखा गया है कि एचआईबी संक्रमित मिलने वाले 60 फीसद मरीजों में टीबी की शिकायत पाई गई है। इसलिए हर टीबी मरीज की एचआईबी की जांच टीबी अस्पताल में भी की जाती है। इसके अलावा जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल स्तर पर भी एड्स की जांच की सुविधा उपलब्ध है पर दवा थैरपी केवल एआरटी सेंटर में ही उपलब्ध है।

साल पुरुष महिला किन्नर बच्चे बच्ची कुल

2011 288 200 01 31 13 533

2012 299 183 03 17 199 518

2013 279 188 00 21 12 479

2014 305 177 00 23 04 509

2015 226 157 00 15 11 409

2016 259 154 00 20 05 438

2017 296 146 05 13 07 467

2018 285 170 01 19 10 485

2019 327 171 03 15 06 522

2020 301 166 03 16 05 491

नोट: पिछले दस साल में 6200 मरीज मिले जिसमें 1330 की मौत् हो चुकी है अभी जिले में 4870 मरीज मौजूद है।

राहत: 80 फीसद मरीज में वायरस लोड शून्य-

नोडल अधिकारी का कहना है कि एचआईबी संक्रमित मिलने वाले मरीजों की नियमित थैरपी संचालित करने केलिए एनजीओ की मदद से निगरानी रखी जाती है। एक गोली नियमित सेवन करने पर 4870 मरीज में से 80 फीसद मरीजों में वायरस लोड शून्य पाया गया है। यह थैरपी नियमित चलेगी जिससे एचआईबी का वायरस शरीर में एक्टिव न हो सके।

पिछले तीन साल में संक्रमित मां से नवजात में नहीं मिला वायरस-

एआरटी सेंटर में दर्ज 22 गर्भवती महिलाओं का पिछले तीन साल में प्रसव हुआ है। इन महिलाओं को लगातार दवा थैरपी दी गई ,जिसके बदौलत इन तीन साल में पैदा हुए 22 नवजात शिशुओं में एचआईबी का संक्रमण नहीं पाया गया।

Posted By: anil tomar

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