World Disabled Day: विक्रम सिंह तोमर.ग्वालियर। समाज किसी भी व्यक्ति की उपयोगिता अपनी सुविधा के हिसाब से निर्धारित करता है । अगर कोई शारीरिक रूप से असामान्य या दिव्यांग है तो उसे खुद को साबित करना पड़ेगा तब ही कहीं जा कर समाज उसका मोल करेगा। अगर ऐसा नहीं होता है, कोई दिव्यांग खुद को साबित करने में विफल हो जाता है ताे समाज के लिए उसका जीवन सिर्फ चार दीवारी मे चारपाई पर लेटे- लेटे ही गुजर जाएगा । यह बात एलएनआईपी से सेवानिवृत्त स्पोर्टस कोच वीके डबास ने नईदुनिया से बातचीत के दौरान कही । कोच डबास ने बताया कि वर्ष 1996 से वह इसी प्रकार के दिव्यांग छात्रों को अलग-अलग स्पोर्टस सिखा रहे है। अपना अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि इस प्रकार के छात्रों में उन्होंने एक अजीब सी ललक देखी है , जो आम छात्रों में देखने नहीं मिलती है । अब तक उनके सिखाए छात्रों ने एशियन और कोमन वेल्थ गेम सहित 350 अंतराष्ट्रीय मैडल प्राप्त किए हैं। वहीं दूसरी ओर 9 छात्रों ने विक्रम अवार्ड ,1 को राजीव गांधी खेल पुरस्कार , 4 अर्जुन अवार्ड और 50-60 अवार्ड अलग-अलग राज्यों के हिसाब से अवार्ड मिले हैं। आइए आपको कुछ ऐसे खिलाडियों से रूबरू करवाते हैं जिन्होंने दिव्यांग होने के बावजूद भी समाज में अपनी जगह बनाई ।

1- अबकी बार चाइना में करूंगी फतह-

मूलत: ग्वालियर की रहने वाली प्राची यादव वर्तमान में भोपाल में रहकर प्रैक्टिस कर रहीं हैं । बचपन से ही दोनों पैर खराब होने के बावजूद प्राची ने कभी हिम्मत नहीं हारी । वर्तमान में पैरा केनो खिलाड़ी के रूप में देश का गौरव बढ़ाने वाली प्राची ने पैराकेनो में वल्ड कप में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा । अपने सफर के बारे में जानकारी देते हुए प्राची ने बताया कि वर्ष 2007 में प्राची ने तैराकी की शुरूआत की थी, जिसमें राष्ट्रीय स्तर तक गाेल्ड मैडल लेने के बाद वर्ष 2018 में अपने कोच के परामर्श पर पैरा केनो की तैयारी शुरू कर दी । इसके बाद पूरी हिम्मत और मेहनत से अपना नाम देश भर में रोशन कर दिया । आगामी योजनाओं के बारे में बताते हुए प्राची ने कहा कि अक्टूबर 2023 में चाइना में प्रतियोगिता होना निर्धारित है । इस बार चाइना में फतह करूंगी ।

2- पोलियो को हराकर बने तैराक-

ग्वालियर शहर के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय पैरा स्विमर सतेंद्र सिंह लोहिया शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं, पोलियों के कारण से इनके पैर बचपन से ही कमजोर थे । इस कमजाेरी से कभी इनके हौसले कमजोर नहीं हुए । इन्हाेंने सितंबर 2022 में आयरलैंड में 36 किलोमीटर लंबे नार्थ चैनल को 14 घंटे 39 मिनट में पार कर रिकॉर्ड बनाया है। इसके बाद सतेंद्र इंग्लिश चैनल, कैटलीना चैनल और अब नार्थ चैनल पार करने वाले पहले एशियाई दिव्यांग तैराक बन गए हैं । सतेंद्र को खेल सम्मान विक्रम अवार्ड भी मिल चुका है। 2019 में देश के सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाड़ी का खिताब भी इन्होंने हासिल किया है । इसके अलावा पैरालिम्पिक और वर्ल्ड पैरा स्विमिंग चेम्पियनशिप में गोल्ड सहित कई मैडल भी हासिल कर चुके हैं। 6 नेशनल दिव्यांग स्वीमिंग चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुके हैं और 6 सिल्वर एवं 7 ब्रॉन्ज जीत चुके हैं । वहीं 2 इंटरनेशनल स्पर्धाओं में भाग लेकर 2 सिल्वर व एक ब्रॉन्ज हासिल कर चुके हैं ।

Posted By: anil tomar

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