-ग्वालियर में दिव्यांगों में लिए ट्रायसिकिल सही करने के लिए कोई सिस्टम नहीं

-एलिम्को की टीम का करना पड़ता है इंतजार

World Disabled Day: वरुण शर्मा. ग्वालियर। दिव्यांगों की मदद के लिए सिस्टम भी दिव्यांग है। ग्वालियर में यही हकीकत है। मौजूदा स्थिति में अगर किसी दिव्यांग को अपनी मोटराइज्ड या नान मोटराइज्ड ट्रायसिकिल खराब होने पर सही करानी है तो कोई सिस्टम ही नहीं है। इसके लिए आर्टिफिशियल लिंबस मैन्युफैक्चरिंग कार्पाेरेशन आफ इंडिया जबलपुर की टीम का इंतजार करना होता है, नौबत यह है कि दिव्यांगजन ट्रायसिकिल का उपयोग तक नहीं कर पाते हैं। इसमें तकनीकी के कारण स्थानीय स्तर पर कोई ठीक करने का विकल्प भी नहीं है। यही कारण है कि दिव्यांगजन मजबूरी में नए वाहन की मांग के लिए कतार में रहते हैं, लेकिन एक बार जिसे ट्रायसिकिल मिल जाती है, उसे दोबारा नहीं मिलती है। जिले में चार सौ से ज्यादा ऐसे दिव्यांग हैं जो ट्रायसिकिल ठीक करने के लिए भटक रहे हैं।

यहां यह बता दें कि दिव्यांगों के लिए ट्रायसिकिल दिए जाने का प्राविधान है,ऐसे दिव्यांगजन जिनकी दिव्यांगता का प्रतिशत 80 प्रतिशत है उन्हें ही यह प्रदान की जाती है। वर्तमान में कुल 21 प्रकार की दिव्यांगता होती है। ट्रायसिकिल के लिए भारत सरकार का उपक्रम आर्टिफिशियल लिंबस मैन्युफैक्चरिंग कार्पोरेशन आफ इंडिया की जबलपुर यूनिट से ट्रायसिकिल मंगवाई जाती है। पहले एलिम्को की टीम आकर ग्वालियर में शिविर लगाती है इसके बाद परीक्षण में जो दिव्यांग पात्र पाए जाते हैं उन्हें यह प्रदान कर दी जाती है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से बजट दिया जाता है।

अभी तक माननीयों की निधि से मिलती थी,अब पूरा फंड केंद्र से

दिव्यांगजनों को ट्रायसिकिल देने के लिए अब केंद्र से ही पूरा बजट दिया जाने लगा है। अभी कुछ समय पहले तक मोटराइज्ड ट्रायसिकिल की कुल कीमत 42 हजार में से 17 हजार रूपए केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता था। शेष राशि माननीयों जिन्हें ट्रायसिकिल वितरण करना है वे अपने मद से देते थे। अब यह बदलाव कर दिया गया है।

दिव्यांगों को कराई थी ट्रेनिंग,वर्कशाप खुलना था कुछ नहीं हुआ

यहां यह बता दें कि 2018 में राष्ट्रपति की मौजूदगी में ग्वालियर में दिव्यांगों के लिए सबसे बड़ा समारोह किया गया था। इसमें 119 दिव्यांगों को मोटराइज्ड ट्रायसिकिल प्रदान की गई थीं। इसके बाद ही ट्रायसिकिल की खराब होने की स्थिति में परेशानी आने लगी। एलिम्को की टीम के आने पर रिपेयरिंग हो पाती थी। इसके बाद सामाजिक न्याय विभाग ने दिव्यांगों को ही ट्रेनिंग कराई और इसके लिए छह युवा दिव्यांगों को चुना गया। आइटीआइ में इसके लिए ट्रेनिंग भी कराई लेकिन फिर मामला आगे नहीं बढ़ सका। अभी भी यही स्थिति है। शनिवार को एलिम्को की टीम की मौजूदगी में दिव्यांगों के उपकरण प्रदान किए जाएंगें।

फैक्ट फाइल

ग्वालियर में दिव्यांगजन: 17000

मोटराइज्ड ट्रायसिकिल प्राप्त: 350

दिव्यांगता के प्रकार: 21

आमतौर पर सामने न आ पाने वाली दिव्यांगता: 14

ज्वाइंट डायरेक्टर: कोई जवाब नहीं

इस मामले में नईदुनिया ने सामाजिक न्याय विभाग की ज्वाइंट डायरेक्टर उषा शर्मा से संपर्क किया। उनके मोबाइल नंबर पर काल किया तो फोन नहीं उठे और मैसेज भी किया गया।

Posted By: anil tomar

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