केस-1 राजेंद्र सोनी ने बताया कि अचानक लॉकडाउन होने के कारण शहर में सभी दुकाने बंद हो गईं। कुछ दिन समय बाद तंबाकू या गुटका भी मिलना बंद हो गया। चाह कर भी इसका सेवन नहीं कर पाए। शुरुआती कुछ दिनों में तकलीफ हुई। यहां-वहां कोशिश करते थे कि कहीं तंबाकू मिल जाए। लेकिन कुछ ही दिनों में सब सामान्य हो गया। अब तंबाकू मिल भी रही है तो सेवन की इच्छा नहीं होती है। यह लत पूरी तरह से छूट गई है।

केस-2 विजय गोयल कहते हैं कि मुझे सालों से सिगरेट पीने की लत थी। ऐसा कोई दिन नहीं जाता था कि स्मोकिंग न करूं। लेकिन कोविड-19 के कारण शहर बंद हो गया तो सिगरेट मिलना बंद हो गई। दूसरी ओर घर से निकलने में भी डर लगता था। बाहर निकलने की कोशिश भी करता था तो घरवाले कोरोना का डर दिखा देते थे। इसके बाद यह लत छूट ही गई।

ग्वालियर (नईदुनिया रिपोर्टर)। World No Tobacco Day : कोरोना से जंग अभी भी जारी है और लॉकडाउन में मिली कुछ रियायतों के बीच कोरोना साथ जीना सीख रहे हैं। कोरोना की जंग का परिणाम भले ही अभी आना बाकी है, लेकिन कई लोग हैं जिन्होंने इस लड़ाई के बीच नशे से अपनी जंग जीत ली है। सालों तक तंबाकू का सेवन करने के बाद दो महीने के लॉकडाउन में खुद को नशे से दूर कर स्वस्थ जीवन के करीब कर लिया है।

यह तो महज दो लोगों के उदाहरण हैं, लेकिन शहर में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है जिन्होंने लॉकडाउन में नशे की लत से मुक्ति पाई। कोरोना वायरस के कारण अभी तक देश में जितनी मौत हुई हैं, उससे आधी से ज्यादा मौत हर दिन तंबाकू के कारण होने वाले कैंसर व इससे जुड़ी अन्य बीमारियों से हो जाती हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह लत कितनी खतरनाक है।

आईएएनएस के आंकड़े बताते हैं कि देशभर में करीब 2739 लोग तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों के कारण कैंसर व अन्य बीमारियों से हर रोज दम तोड देते हैं। यदि हम अपने शहर की बात करें तो जिला तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के अनुसार शहर में हर तीसरा व्यक्ति तंबाकू की लत का शिकार है।

इसलिए मनाते हैं तंबाकू निषेध दिवस

विश्व धूमपान निषेध दिवस या अंतरराष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस हर साल 31 मई को मनाया जाता है। तंबाकू से होने वाले नुकसान को देखते हुए साल 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सदस्या देशों ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसके बाद 7 अप्रैल 1988 से इस दिवस को मनाने का फैसला किया गया। इसके बाद प्रतिवर्ष 31 मई को तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है।

2030 तक तंबाकू उपयोग करने वाले होंगे 50 प्रतिशत लोग

जिला तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी डॉ. आलोक पुरोहित बताते हैं कि किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन शरीर के सभी हिस्सों पर हानिकारक प्रभाव डालता है। यहां तक कि धुंआ रहित तंबाकू प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में भी इसी तरह के दुष्प्रभाव का कारण बनता है। हमारे शरीर के अंगों को सीधे नुकसान पहुंचाने के अलावा, धुंआरहित तंबाकू का उपभोग करने से दिल के दौरे से मरने की संभावना काफी बढ़ जाती है। वहीं सिगरेट भी सिर्फ फेफड़ों को ही नुकसान नहीं पहुंचाती है, बल्कि यह शरीर के अन्य तंत्रों के लिए भी बहुत नुकसानदायक है। डॉ. पुरोहित ने बताया कि 2030 तक यदि तंबाकू का उपयोग इसी प्रकार से बढ़ता गया तो 50 प्रतिशत लोगों को तंबाकू द्वारा अनेक बीमारियों का सामना करना होगा। इसका प्रभाव अलग-अलग तरह के कैंसर के रूप में देखने को मिलेगा।

तंबाकू से होने वाली बीमारियां

- मुंह का खुलना बंद होना

- मुंह के अंदर छाला होना

- फेफडों और मुंह का कैंसर होना

- फेफड़ों का खराब होना

- दिल की बीमारी

- आंखों से कम दिखना

- मुंह से दुर्गंध आना

लॉकडाउन के तहत पुलिस के किए जुर्माने

लॉकडाउन के तहत शहर में तंबाकू सेवन करने वाले लोगों का पुलिस द्वारा कार्रवाही की गई है उनके लगभग 40 हजार रुपए का जुर्माना भी किया गया। कंपू थाने टीआई विनय शर्मा ने 2000 रुपए और मुरार थाने के टीआई अमित सिंह भदौरिया ने 19200 रुपए तंबाकू रहित सेवन करने वालों से एकत्रित किए है।

जिला तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ नियम

- शैक्षणिक संस्थानों के 100 मीटर के अंदर तंबाकू उत्पादों की बिक्री नहीं की जा सकती है। ऐसा करते पाए जाने पर 200 रुपये का जुर्माना है।

- सेक्शन 6 के अंतर्गत पब्लिक प्लेस पर तंबाकू प्रोडक्ट बिक्री करते पाए जाने पर जिला तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ की रसीद काटकर चालान किया जा सकता है।

- कोटपा के सेक्शन 4 के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर धूमपान नहीं कर सकता है। यदि पाया गया तो 200 रुपए चालान होगा।

- कोटपा सेक्शन 5 के अंतर्गत तंबाकू प्रोडक्ट का प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है जैसे बोर्ड पर या कहीं तंबाकू टांगकर नहीं रख सकते हैं। फेसबुक या वॉट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी तंबाकू का प्रचार नहीं कर सकते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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