World Nurse Day Special: वरूण शर्मा, ग्वालियर नईदुनिया। काेविड में नर्स की सेवाभावी भूमिका फिर एक बार उभरकर सामने आई है। इस वर्ग ने काेविड की शुरुआत से लेकर अभी तक पॉजिटिव मरीजाें काे अपना माना आैर उनकी पूरी शिद्दत से सेवा की। उनके प्रयासाें के फलस्वरुप कई मरीज स्वस्थ हाेकर अपने स्वजनाें के पास पहुंचे। सेवा के दाैरान नर्साें ने अपनी सेहत की कतई चिंता नहीं की। अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर हम आपकाे एेसी ही प्रेरक कहानियाें से रूबरू करा रहे हैं, जिन्हाेंने फ्लाेरेंस नाइटेंगल के दिखाए मार्ग पर चलकर मानवता की सेवा की। इनमें से कई नर्स ताे एेसी भी हैं, जाे खुद संक्रमण की चपेट में आईं, मगर हाैंसले की बदाैलत स्वस्थ हाे गईं आैर फिर से मरीजाें की सेवा में जुट गईं।

संक्रमण की हराकर आगे बढ़ी संध्याः कोरोना जिला अस्पताल मुरार की 35 वर्षीय स्टाफ नर्स संध्या गुप्ता के जीवन में बाधा नहीं डाल पाया। वे खुद कोरोना का शिकार बनीं, लेकिन वह जरा भी नहीं डरीं, क्योंकि दूसरे कोविड मरीजों के लिए ड्यूटी करनी थी। संध्या का कहना है कि उनकी डेढ़ साल की बेटी है। उनकी जुलाई 2020 में भी कोविड में ड्यूटी लगाई गई थी। वहां पर लगातार सात माह तक ड्यूटी की। इस बीच उन्होंने एक दिन का भी अवकाश नहीं लिया। पीपीई किट पहनकर वे मरीजों के बीच जाकर उन्हें दवाई देकर उनकी सेवा करती रहीं। बच्ची छोटी थी, इसलिए खुद व परिवार का बचाव भी जरूरी था। घर पहुंचने पर पहले वह खुद को सैनिटाइज करतीं, इसके बाद ही बच्चे के पास जातीं। एक अप्रैल 2021 में कोरोना ने फिर आमद दी, तो इस बार उन्होंने खुद कोविड में ड्यूटी की जिम्मेदारी संभाली, लेकिन इस बार खुद के बचाव में चूक हुई और 20 अप्रैल को वे संक्रमण की चपेट में आ गईं। जिसके चलते उनके पति भी कोरोना संक्रमित हो गए। उपचार के बाद स्वस्थ हाे फिर मरीजाें के बीच पहुंची।

आगे बढ़कर संभाला कोविड महामारी में मोर्चाः जिला अस्पताल की 40 वर्षीय स्टाफ नर्स मनीषा पाल ने भी कोरोना महामारी में खुद आगे बढ़कर ड्यूटी चुनी। मनीषा का कहना है कि वर्ष 2020 में जिला अस्पताल को कोविड केयर सेंटर बनाया गया था। उस समय सभी कोरोना महामारी से भयभीत थे, इसलिए ड्यूटी से हर कोई बचना चाहता था, लेकिन इस बीच मुझे जिम्मेदारी मिली तो मैंने आगे बढ़कर ड्यूटी स्वीकार की। कोरोना में ड्यूटी के बाद घर परिवार को संभालने की जिम्मेदारी भी मेरे कंधों पर है। मेरे सास ससुर वृद्ध हैं, इसलिए उन्हें गांव पहुंचा दिया। घर में दो बच्चे व पति हैं। जिनके लिए सुबह खाना बनाकर मैं सुबह नौ बजे ड्यूटी पर आ जाती हूं और शाम को घर पहुंचकर खुद को सैनिटाइज कर घर का कामकाज संभालती हूं।

Posted By: vikash.pandey

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