ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सिटी सेंटर सहित आसपास के क्षेत्र में आमजनों के सुबह एवं शाम को घूमने के लिए सबसे शानदार जगह जीवाजी विश्वविद्यालय का ट्रैक है। अब जल्द ही जीवाजी विश्वविद्यालय में योगा वन भी जुड़ने जा रहा है। इसके लिए एलआइसी की तरफ प्रशासनिक इमारत के पास जगह तय की गई है। इस स्थान का चयन इसलिए किया गया है, क्योंकि यहां पर जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर में बरसने वाली पानी बहकर आता है। यहां पर एक पुराना बोर है, इस बाेर के पास वाटर हार्वेस्टिंग की किट बनाई जाएगी। जिससे यहां पर बहकर आने वाला पूरे पानी का उपयोग भूजल स्तर को बढ़ाने में किया जा सके। इसके साथ ही यहां पर योग के लिए अलग-अलग प्लेटफार्म बनाए जाएंगे, जहां पर जीवाजी विश्वविद्यालय के खेल विभाग के छात्र योगा सिखाएंगे।

जीवाजी विश्वविद्यालय में योगा वन बनाया जा रहा है। इस योगा वन क्षेत्र में सुबह याेगा की कक्षाएं लगा करेंगी, जिससे यहां पर घूमने के लिए आने वाले लोग याेगा का प्रशिक्षण लेकर अपने आप को स्वस्थ्य रख सकें। जीवाजी विश्वविद्यालय में प्रतिदिन एक से दो हजार के करीब लोग सुबह व शाम को घूमने के लिए आते हैं। योगा के लिए यहां पर अलग-अलग प्लेटफार्म बनाए जाएंगे, जिससे यहां पर लोग योगा सीख सकें। योगा की कक्षाएं लगाने के लिए जीवाजी विश्वविद्यालय के छात्र यहां पर निशुल्क ट्रेनिंग देंगे।

एक्यूप्रेशर से करेंगे रोगाें को दूरः शरीर के विभिन्न रोगों को दूर करने के लिए प्राचीन एक्यूप्रेशर पद्धति का यहां पर उपयाेग किया जाएगा। इसके लिए याेगा वन में घूमने की जगह पर एक्यूप्रेशर वाली टाइल्स लगाई जाएंगी, इन टाइल्सों पर लोग पैदल घूमकर स्वास्थ्य लाभ ले सकेंगे।

वाटर हार्वेस्टिंग की किट लगाई जाएगीः योगा वन के मध्य में जीवाजी विश्वविद्यालय की पुरानी बोरिंग है, जो कि बंद हो चुकी है। जीवाजी विश्वविद्यालय करीब 100 हैक्टेयर भूमि में फैला हुआ है, इस पूरे क्षेत्र का ढलान जीवाजी विश्वविद्यालय के पास बने एलआइसी वाली सड़की की ओर है। वर्तमान में जितना भी बारिश का पानी परिसर में बरसता है, उसमें से करीब 25 प्रतिशत पानी वहां पर मौजूद वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए संग्रहित हो पाता है, लेकिन याेगा वन के पास वाटर हार्वेस्टिंग लगा दिए जाने से करीब 90 प्रतिशत पानी काे संग्रहित कर उसका उपयोग भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए किया जा सकेगा।

पूर्व छात्र देंगे मददः याेगा वन को बनाने के लिए जीवाजी विश्वविद्यालय में पढ़कर उच्च पदों पर पहुंचे पूर्व छात्र मदद देंगे। जीवाजी विश्वविद्यालय में होने वाली एल्युमिनी मीट में पूर्व छात्र आते हैं, उन्हें जब इस प्रोजेक्ट के बारे में बताया गया तो उन सभी ने इसमें योगदान देने की बात स्वयं ही कही है। इससे इस पूरे प्रोजेक्ट में जीवाजी विश्वविद्यालय का अधिक पैसा खर्च नहीं होगा।

वर्जन-

जीवाजी विश्वविद्यालय में योगा वन बनाया जाना है, इसके लिए पूर्व छात्रों ने सहयोग देने की बात कही है। वहीं इस पूरे प्रोजेक्ट से यहां पर आने वाले लोगों को काफी लाभ हाेगा।

प्रोफेसर अविनाश तिवारी, कुलपति जीवाजी विश्वविद्यालय

Posted By: vikash.pandey

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