जैन संतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समाज ने माना मुख्यमंत्री का आभार

खिरकिया। जैन साधु साध्वियों के आगामी चतुर्मास को किए जाने वाले विहार के दौरान सुरक्षा साधन व व्यवस्था मुहैया कराए जाने के आदेश मप्र शासन द्वारा दिए हैं। उज्जौन विधायक पारस जैन, रतलाम विधायक चैतन्य कश्यप सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से समाज द्वारा यह मांग रखी गई थी। जिस पर शासन द्वारा विहार के दौरान साधु संतों की परिस्थिति के अनुसार आवश्यक व्यवस्था मुहैया कराने के निर्देष प्रदेश के सभी पुलिस अधीक्षकों को दिए हैं। जिस पर जैन समाज द्वारा मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, विधायक पारस जैन, चैतन्य कष्यप सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया है। इसी तरह राजस्थान सरकार द्वारा भी साधु संतों की विहार व्यवस्थाओं की सुविधा मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। जिस पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का भी आभार समाज ने माना है। जैन श्वेतांबर श्रीसंघ के अध्यक्ष चंपालाल भंडारी, मंत्री अशोक भंडारी, नवयुवक मंडल अध्यक्ष विक्रम नागड़ा सहित समाजजनों ने आभार व्यक्त किया है।

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पशुपालन कर कृषक कर सकते हैं अतिरिक्त आय का साधन

खिरकिया। नवदुनिया न्यूज

कृषक अब खेती पर ही निर्भर नहीं हैं, वे पशुपालन के माध्यम से भी अपनी आमदनी में अतिरिक्त वृद्घि कर सकते हैं। राज्य शासन की पशुधन बीमा योजना से दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, भेंड-बकरी जैसे अन्य दुधारू पशुओं के साथ अन्य पशुपालन अब आसान हो गया है। पशुधन बीमा योजना से पशुपालकों को अब नुकसान नहीं के बराबर और मुनाफा पूरा मिलता है। पशुधन बीमा सभी श्रेणी के पशुओं के लिए पशु चिकित्सक डॉ एसके त्रिपाठी ने बताया कि पशुधन बीमा योजना हरदा जिले में भी लागू है। इसमें दुधारू पशुओं के साथ ही सभी श्रेणी के पशुधन का भी बीमा कराया जा सकता है। योजना में एक हितग्राही के अधिकतम 5 पशुओं का बीमा किया जाता है। भेड, बकरी, सूकर आदि 10 पशुओं की संख्या को एक पशु इकाई माना गया हैं। इससे आशय है कि भेड, बकरी एवं शूकर के पालक एक बार में अपने 50 पालतु पशुओं का बीमा करा सकेंगे। उन्होंने बताया कि बीमा प्रीमियम पर अनुदान एपीएल श्रेणी के लिए 50 प्रतिशत तथा बीपीएल, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति श्रेणी के पशुपालकों के लिए 70 प्रतिशत एवं शेष राशि हितग्राही देय करेगा। बीमा प्रीमियम की अधिकतम दर एक वर्ष के लिए 3 प्रतिशत व तीन वर्ष के लिए 7.50 प्रतिशत देय होगी। प्रदेश में वर्तमान दरें 2.45 प्रतिशत तथा 5.95 प्रतिशत लागू है। पशुपालक अपने पशुओं का बीमा एक वर्ष तथा तीन वर्ष तक के लिए करा सकेंगे। बीमित पशु-पालकों को बीमित पशु की मृत्यु की सूचना 24 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को देना होगी। पशुपालन विभाग के चिकित्सक शव का परीक्षण कर रिपोर्ट में मृत्यु के कारणों का उल्लेख करेंगे। बीमा कंपनी को अधिकारी दावे संबंधी प्रपत्र एक माह के अंदर प्रस्तुत करेंगे। कंपनी 15 दिवस के अंदर दावे का निराकरण करेगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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