-एक दशक पहले नहरों के लिए किया गया था भू-अर्जन

खिरकिया। नवदुनिया न्यूज

किसानों की खेत सिंचिंत करने के लिए शासन द्वारा जल संसाधन विभाग के माध्यम से विकासखंड में नहरों का निर्माण कराया गया है। इसके लिए किसानों की सैकड़ों एकड़ भूमि को अधिग्रहित की गई है। किसानों की भूमि का भू-अर्जन हुए वर्षों बीत गए हैं, लेकिन अभी तक भू-अर्जन की गई भूमि का रकबा किसानों के रकबे से अलग नहीं हो सका है। भूमि का नामांतरण जल संसाधन विभाग को नहीं किया गया। जानकारी के अनुसार करीब 10 वर्ष पहले ब्लाक में माचक नहर एवं खिरकिया नहर के माध्यम से नहर का विस्तार किया गया। इसके लिए किसानों की सैकड़ों एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। किसानों को इसका मुआवजा भी दिया जा चुका है। बावजूद इसके अभी तक किसानों के खातों से नहर के लिए अधिग्रहित की गई भूमि को कम नहीं किया है। ऐसी स्थिति में यदि किसान अपनी भूमि बेचना चाहते है, तो उनकी रिकार्ड में तो भूमि ज्यादा है, लेकिन सीमांकन कराने पर कम निकलती है। इससे विवाद की स्थिति बन रही है।

कागज में किसान उगा रहे फसलः किसानों के भू अधिकार पत्र, खसरा रकबा में अभी भी उतनी ही भूमि दर्ज है, जितनी की भूमि अधिग्रहण के पहले हुआ करती थी, जबकि वास्तविक रूप से उसमें से अधिग्रहित की गई भूमि पर नहर का निर्माण किया जा चुका है। ऐसे में कागजों में दर्ज भूमि के रकबे के अनुसार किसान उस पर फसल का उगा रहे हैं, जबकि जमीन पर उसमें से कुछ रकबे पर नहर बह रही है।

राजस्व विभाग ने अब तक नहीं की कार्रवाई-

ब्लाक के करीब 90 गांवों की 400 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हुआ है। नहर के निर्माण में किसी की 10 तो किसी की 20 डिसमिल और कहीं आधा-आधा एकड़ तक जमीन का अधिग्रहण किया गया है। इस भूमि का भू-अर्जन व अवार्ड भी किया जा चुका है। यह भूमि जल संसाधन विभाग के आधिपत्य में तो आ गई है, लेकिन अभी तक कागजी तौर पर विभाग के नाम पर दर्ज नहीं हुई है।

वर्जन...

राजस्व विभाग को पूर्व में अभिलेख उपलब्ध कराए जा चुके हैं। यह भूमि किसानों के खातों से कम कर जल संसाधन विभाग के नाम पर दर्ज की जानी चाहिए। राजस्व विभाग को भूमि का नामांतरण किया जाना है।

-बीएस चौहान, एसडीओ, जल संसाधन विभाग, खिरकिया

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ऑनलाइन व ऑफलाइन प्रक्रिया के चक्कर में कुछ स्थानों पर अंतर आया है। इसका निराकरण करा दिया जाएगा।

-कुलदीपसिंह, नायब तहसीलदार, खिरकिया

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Posted By: Nai Dunia News Network

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