-आचार्य नानेश का 58वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया

खिरकिया। नवदुनिया न्यूज

आचार्य नानेश मसा का आचार्यत्वकाल अनेक उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा। वे अत्यंत सरलमना थे। संत-सती और श्रावक-श्रविका तो क्या नन्हें बालक के प्रति भी उनका व्यवहार देखने लायक था। श्रमण जीवन अंगीकार कर आत्मकल्याण के साथ-साथ उन्होंने परोपकार के लिए अपना संपूर्ण जीवन अर्पित कर दिया था। यह बात श्वेतांबर जैन धर्म में हुक्मी संघ के अष्टम पट्टधर समाधिस्थ आचार्य नानेश के 58वें आचार्य पदारोहण दिवस पर समाज द्वारा समता भवन में आयोजित नानेश गुणानुवाद सभा में रविवार को समाज के कोषाध्यक्ष निर्मल जैन ने कही। उन्होंने कहा कि आचार्य नानेश ने व्यक्ति से लेकर विश्व तक को अशांत वातावरण से शांत वातावरण प्राप्त करने के लिए समता-दर्शन की परिपालना करना आवश्यक बतलाया और इसे सकारात्मक रूप देने के लिए समता-दर्शन और व्यवहार पुस्तक में चार सिद्धांत प्रतिपादित किए।

सभा में आशीष समदड़िया ने कहा कि आचार्य नानेश महान ध्यान योगी थे। उन्होंने ध्यान साधना की विलक्षण पद्धति समीक्षण ध्यान प्रस्तुत की, जो व्यक्ति को शारीरिक संतुलन से आगे बढ़कर तनाव-मुक्ति के साथ-साथ आत्मशांति प्रदान कर सके। समीक्षण ध्यान साधना पद्धति को अपनाकर व्यक्ति अपना बाह्य एवं आभ्यंतर विकास कर सकता है। इस दौरान समता भवन में रायसी प्रतिक्रमण, नवकार महामंत्र जाप, चार शरण, सिद्ध स्तुति, बारह भावना, आचार्यश्री नानेश चिंतन, नानेश चालीसा, रामेश चालीसा, 24 तीर्थंकर वंदना, गुरु वंदना आदि पाठ एवं स्तुतियां की गई। संघ के कोषाध्यक्ष निर्मल विनायक, कमलचंद समदड़िया, हुकुमचंद बनवट, नरेंद्र विनायक, सुरेश रैदासिनी, बसंत भंडारी, मोहन सोनी, राजकुमार रांका, आशीष समदडिया, पंकज भंडारी आदि उपस्थित थे।

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