प्रदीप शर्मा। हरदा नवदुनिया

दऊआ अभी जिंदा है! यह डायलाग दरअसल एक फिल्म की तरह है, लेकिन उतना ही सच है जितना दऊआ को कागजों में वन विभाग द्वारा मृत बताया गया है। वन अपराध में लिप्त आरोपित दऊआ पिता ओझा को बचाने के लिए वनपाल ने ही प्रकरण को बंद करने के लिए दऊआ का मृत्यु प्रमाण पत्र नस्ती के साथ लगाकर प्रकरण बंद कर दिया। लेकिन तीन साल पहले कागजों में मर चुका दऊआ 2020 में जीवित हो गया। शिकायतकर्ता फैयाज खान ने जनवरी 2020 में डीएफओ को शिकायत की थी। जिसमें बताया था कि वन प्रकरण क्रमांक 12665/25 दिनांक 27 अप्रैल 2017 में जांच अधिकारी वनपाल एसआर कलमे द्वारा जिस व्यक्ति पर प्रकरण कायम किया था उसे मृत बताकर प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया, लेकिन जिसे मृत बता दिया वह ग्राम पंचायत लोधीढाना में अपने निवास पर रह रहा है, लेकिन वनपाल की जांच में उसे पहले लापता बताया और बाद में मृत घोषित कर दिया। वन अपराध में लिप्त दऊआ के खेत से वन विभाग को 62 हजार रुपये की सागौन जब्त की थी। जिसमें प्रकरण तैयार कर कार्रवाई भी शुरू की गई, लेकिन जीवित व्यक्ति को मृत बताकर मामला रफादफा कर दिया गया।

एसडीओ ने की वनपाल की जांच

शिकायत के बाद वन विभाग के एसडीओ शरद दुबे द्वारा जांच शुरू की गई। जिसमें पहले शिकायर्ता के बयान दर्ज किए गए। इसके बाद ग्राम पंचायत लोधीढाना के सरपंच साबूलाल सिराले के बयान दर्ज किए गए। एसडीओ शरद दुबे ने बताया कि जांच में प्रथम दृष्टया वनपाल एसआर कलमे दोषी पाए गए। जिसका प्रतिवेदन डीएफओ को भेजा गया। डीएफओ नरेश दोहरे द्वारा एक माह पहले यानी अक्टूबर 2020 में वनपाल एसआर कलमे को निलंबित कर हंडिया रेंज में अटैच कर दिया। साथ ही आरोप पत्र भी वनपाल को दे दिया गया है।

यह था मामला

रहटगांव तहसील के अंतर्गत आने वाले वनग्राम लोधीढाना में घटित वन अपराध प्रकरण क्रमांक 12665/25 दिनांक 27/4/2017 की जांच एसआर कलमे द्वारा की गई। जिस व्यक्ति पर प्रकरण कायम किया गया था उसे मृत बताकर प्रकरण को नस्ती बद्ध कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि नस्तीबद्घ प्रकरण के पंचनामा में हस्ताक्षर करने वाले पंचों एवं बीट गार्ड संजय कुचबंदिया के खिलाफ वन विभाग द्वारा कोई जांच नहीं की गई है। मालूम हो कि भारतीय दंड संहिता के अनुसार जो लोक सेवक जानबूझकर फर्जी दस्तावेज का निर्माण करता है उसके खिलाफ धारा 167 के तहत एफआइआर दर्ज की जाती है। जिसमें जिसमें तीन साल की सजा का प्रावधान है।

इनका कहना है

वनपाल एसआर कलमे द्वारा मृत्यु प्रमाणपत्र लगाकर वन अपराध में लिप्त आरोपित दऊआ का प्रकरण निरस्त कर दिया। जिसकी शिकायत की थी। इस मामले में जांच अधिकारी एसडीओ शरदचंद्र दुबे को अपने बयान दर्ज कराए थे। दस्तावेज प्रमाणित होने के बाद डीएफओ ने वनपाल एसआर कलमे को निलंबित कर दिया, लेकिन बीट गार्ड संजय कुचबंदिया और पंचनामा पर हस्ताक्षर करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

फैयाज खान, शिकायतकर्ता

इनका कहना है

दऊआ पर वन अपराध 2017 में दर्ज था, जिसकी जांच मेरे द्वारा की गई। लागातार खोजबीन के बाद दऊआ की जानकारी नहीं मिली। पूछताछ करने पर घर के लोगों द्वारा दऊआ का मृत्यु प्रमाण पत्र दिया गया। इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। वरिष्ठ अधिकारी द्वारा निलंबित कर दिया गया है।

-एसआर कलमे, वनपाल

इनका कहना है

दऊआ वर्तमान में जिंदा है। यह बयान एसडीओ शरदचंद्र दुबे के समक्ष दर्ज किए गए थे। वहां पर भी हमने यही कहा। दऊआ अभी गांव में रह रहा है।

-साबूलाल सिराले, लोधीढाना सरपंच

वर्जन

आपके द्वारा यह मामला संज्ञान में लाया जा रहा है। ग्राम पंचायत लोधीढ़ाना के सचिव द्वारा यदि जीवित व्यक्ति का मृत्यु प्रमाणपत्र बनाया जा रहा है़ तो गंभीर लापरवाही है। आज ही इस मामले की जांच की जाएगी।

रामकुमार शर्मा, जिला पंचायत सीईओ

Posted By: Nai Dunia News Network

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