हरदा। नवदुनिया प्रतिनिधि

कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहे किसानों के सामने अब खेतों में खरीफ फसल बोवनी का संकट खड़ा हो गया है। बेरोजगारी से जूझ रहे किसानों के सामने महंगे बीज खरीदने की समस्या पैदा हो गई है। वहीं हर साल बिगड़ रही सोयाबीन की फसल का रकबा कम करने के लिए कृषि विभाग जूम मिटिंग कर किसानों से चर्चा कर रहे हैं। मानसून की आहट के साथ ही खरीफ फसलों की बोवनी की तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल बारिश की देरी से किसान थोड़े चिंतित हैं। कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष खरीफ फसलों का रकबा बढ़ने की उम्मीद है। कुछ क्षेत्रों में इस वर्ष सोयाबीन फसल के रकबे में वृद्धि की संभावना है। क्षेत्र के किसान इस समय खेती की तैयारियों में जुट गए हैं। कई किसान अपने खेतों में बोई मूंग की फसल को काट कर खेतों की सफाई के कार्य में लगे हैं, तो कई किसान अपने खेतों में खड़ी मूंग फसल को काटने की तैयारी कर रहे हैं। जिन किसानों द्वारा अपने खेतों को पूरी तरह से साफ कर लिया गया है वे अब मानसून के आने का इंतजार कर रहे हैं। इस समय क्षेत्र के किसानों में सोयाबीन को लेकर असमंजस बना हुआ है, कि इस बार सोयाबीन की बोवनी की न करते हुए अन्य वैकल्पिक फसलों को अपने खेतों में बोएं या नहीं। बीते चार सालों से क्षेत्र में खरीफ की सोयाबीन फसल में किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बीते वर्ष तो क्षेत्र के किसानों के हाथों में एक किलो सोयाबीन की फसल भी नहीं लगी, जिससे किसान पर आर्थिक मार भी पड़ती हुई दिखाई दी। किसानों ने अपनी व्यवस्था कर रबी फसल का उत्पादन किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक उत्पादन ने भी किसानों को राहत नहीं दी।

खेतों को तैयार करने में जुटा किसान

इस समय क्षेत्र का किसान खेतों को तैयार करने में पूरी तरह से जुटा हुआ नजर आ रहा है। कई किसान बीज की व्यवस्था जुटाने में भी लगे हैं। खेतों में तैयारी पूरी होते ही और समय पर मानसून के आते ही किसान बिना देर किए अपनी बोवनी का सिलसिला शुरू कर देगा। वर्तमान समय में नगर की कीटनाशक दुकान सहित व्यापारियों के पास किसान सोयाबीन सहित अन्य फसलों की जानकारी लेने के लिए पहुंचने लगे हैं। क्षेत्र का किसान इस समय पूरी तरह खेतों में जुटा हुआ है।

बीज के भाव के कारण किसान परेशान

इस वर्ष तो सोयाबीन बीज के भाव ने भी किसानों के होश उड़ा दिए हैं। कई किसानों का मानना है, कि बीते वर्ष सोयाबीन फसल का उत्पादन नहीं होने से उनके सामने बीज की बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है, जो बीज उनके पास मौजूद रहता था। अब उसके लिए उन्हें 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल खर्च करना पड़ेगा जो उनके लिए सबसे बड़ा नुकसान है। ऐसे में इस वर्ष कई किसान खरीफ फसल के तहत सोयाबीन की बोवनी करने में अपने कदम पीछे खींच रहे हैं। सभी किसान अपने खेतों में तैयारी करने के साथ ही किसानी की अन्य सभी व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने में जुटे हुए हैं और चारों तरफ से एक ही बोझ किसान के सिर पर नजर आ रहा है कि वह अपने खेतों को तैयार कर बोवनी की तैयारी करें।

सोयाबीन रकबा कम करने दी सलाह

लगातार बिगड़ रही फसलों के बाद कृषि विभाग द्वारा सोयाबीन का करबा कम कर किसानों को मूंग, अरहर सहित अन्य फसलों की बोवनी करने की सलाह दे रह है। इसके लिए जूम पर मिटिंग कर चर्चा भी की जा रही है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस वर्ष 1 लाख 92 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसल की बोवनी की जाएगी। वहीं 1 लाख 50 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन का रकबे में बोवनी की जाएगी। इसके अलाना मूंग, अरहर सहित अन्य फसलों के रकबे में बोवनी करने का लक्ष्‌य रखा गया है।

इनका कहना है

इस वर्ष खरीफ फसल की बोवनी 1 लाख 92 हजार हेक्टेयर में होगी। जिसमें से 1 लाख 50 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी होगी। लगातार बिगड़ रही सोयाबीन की फसल को लेकर किसानों से जूम एप पर चर्चा की जा रही है। जिसमें मूंग, अरहर सहित अन्य फसलों की बोवनी करने की बात कही जा रही है।

कपिल बेड़ा, सहायक संचालक कृषि विभाग

Posted By: Nai Dunia News Network

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