प्रदीप शर्मा। नवदुनिया हरदा

कलेक्टर कार्यालय से जारी एक आदेश ने सरकारी स्कूल के शिक्षकों सहित सरकारी विभागों की नींद उड़ा दी है। आदेश पढ़कर न सिर्फ सरकारी टीचर, बल्कि पूरा सरकारी अमला सकते में आ गया है। कार्यालय कलेक्टर की स्थापना शाखा से 3 जून को जारी आदेश के तहत सरकारी विभागों में कर्मचारियों से अपने जीवित बच्चों की जानकारी मांगी गई है। जिसके तहत अपर कलेक्टर के हस्ताक्षर से जारी पत्र में तीन बच्चे होने पर सेवारत शासकीय सेवकों को सेवा से अपात्र किए जाने का उल्लेख किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी स्तर पर डीईओ सहित करीब 180 शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के तीन जीवित बच्चों की जानकारी निकल कर सामने आई है। इधर सिविल सर्विसेज रूल, 1965 के नियम 22 के उपखंड (4) के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी के दो से अधिक बच्चे होते हैं और अगर उनमें से किसी एक बच्चे का जन्म 26 जनवरी 2001 के बाद हुआ हो तो उसे सेवा में कदाचार माना जाएगा। इस कानून के तहत इस तारीख के बाद कोई भी सरकारी कर्मचारी तीन संतानों को जन्म नहीं देगा, यदि कोई सरकारी कर्मचारी ऐसा करता है तो उसकी सभी सरकारी मदद बंद कर दी जाएगी और उसे नौकरी के अयोग्य माना जाएगा। इस मामले में नियम का उल्लंघन सिद्ध होने पर वर्ष 2016 में दमोह जिला अदालत के तीन भृत्यों को नौकरी से बर्खास्त किया गया था।

विधानसभा में संजय शाह ने मांगी थी जानकारीः विधानसभा के अतारांकित प्रश्न क्र 559 दिनांक 18 दिसंबर 2019 को जीवित 2 से अधिक संतानों में तीसरे बच्चे के सेवारत शासकीय सेवकों को सेवा से अपात्र करने के संबंध में शासन द्वारा निर्धारित प्रपत्र भेजा गया है। जिस पर जानकारी तत्काल चाही गई थी।इस आदेश के साथ 7 कॉलम का एक प्रपत्र भी जारी किया गया था। जिसमें कॉलम नंबर 6 में 26 जनवरी 2001 के बाद जन्में बच्चों की संख्या मांगी गई है। लेकिन अधिकांश सरकारी सेवकों ने विधानसभा में गलत जानकारी दे दी थी। वर्तमान में सरकारी बदलने के बाद विधायक संजय शाह द्वारा चाही गई जानकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हाईकोर्ट ने कहाः दो से ज्यादा संतानें वाले अपात्र

ग्वालियर हाईकोर्ट की बेंच ने 30 जून 2021 के एक मामले डब्लयू - ए 1381/2019 में पारित निर्णय की मानें तो 26 जनवरी 2001 के बाद जिन सरकारी शिक्षकों एवं कर्मचारियों की 2 से ज्यादा संतानें हुई हैं, उन्हें अपात्र कर दिया जाएगा। इस आदेश के बाद सरकारी सेवकों में हड़कंप मच गया है। मामले में अपीलार्थी लक्ष्मणसिंह बघेल ने मप्र शासन के खिलाफ रिट पिटिशन दायर की थी। जिसमें अपीलार्थी ने कहा था, कि नौकरी लगने के विज्ञापन में तीन बच्चों की जानकारी का नहीं लिखा है, इसके लिए उन्हें नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाए। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में यह कहते हुए अपील को खारिज कर दिया, कि सिविल सर्विसेज नियम 2001 पहले बने है। नियम में साफ लिखा है कि शासकीय सेवक के दो से अधिक बच्चे होने को अवाचार माना गया है. यदि उनमें से 1 का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ हो।

जिला शिक्षा अधिकारी के तीन बच्चे

कलेक्टर कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार किसी भी सरकारी सेवक के नियमों के तहत निर्धारित समयावधि में 2 से ज्यादा जीवित संतानों को अपात्र करने की बात लिखी गई है। ऐसी स्थितिमें सबसे अधिक परेशानी में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी देवेंद्र सिंह रघुवंशी आ सकते हैं। साथ ही उनकी पत्नी सीमा रघुवंशी भी कन्याशाला में शिक्षिका हैं। इसके अलावा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ कुछ कर्मचारियों के तीन से अधिक जीवित संतान हैं। आदेश के बाद हड़कंप तो मचा है। साथ ही कुछ शासकीय सेवक गलत जानकारी दे रहे हैं।

वर्जन

कलेक्टर कार्याल से जारी पत्र के अनुसार विभागों से जीवित तीन संतानों की जानकारी मांगी जा रही है। सिविल सेवा आचरण के तहत 26 जनवरी 2001 के बाद हुआ हो तो उसे सेवा में कदाचार माना जाएगा।

रामकुमार शर्मा, जिला पंचायत सीईओ

इनका कहना है

तीन जीवित बच्चों की जानकारी मांगी गई थी। शिक्षा विभाग द्वारा भेज दी गई है। जिले भर में करीब 180 शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के तीन जीवित बच्चों की जानकारी गई है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जीवित तीन बच्चों के कितने कर्मचारी होंगे, इसकी जानकारी नहीं है। देखकर बताऊंगा।

डीएस रघुवंशी, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी

Posted By: Nai Dunia News Network

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