IIM Indore हरदा (नवदुनिया प्रतिनिधि)। जिले को एक माडल के रूप में विकसित करने जिला प्रशासन ने किए जा रहे हैं। इसमें अब भारतीय प्रबंधन संस्थान इंदौर (आइआइएम इंदौर) भी सहयोग करेगा। इसके लिए बुधवार को आइआइएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय और कलेक्टर ऋषि गर्ग ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। आइआइएम इंदौर के साथ हुए एमओयू के अनुसार जिले के बाजार को मजबूत करने के लिए नए कदम उठाए जाएंगे। आइआइएम इंदौर हरदा जिले के स्थानीय बाजार को मजबूत करने के लिए मार्केटिंग प्लान बनाएगा। आइआइएम इंदौर हरदा जिले के स्थानीय बाजार के लिए मार्केटिंग और ब्रांडिंग रणनीति तैयार कर रहा है।

हरदा जिले में ग्रामीण पर्यटन, ईको-टूरिज्म, कैंपिंग और प्राकृतिक ट्रेक को बढ़ावा देकर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय ग्रामीणों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही किसान उत्पादक संगठनों को भी मजबूत बनाया जाएगा, ताकि किसान आत्मनिर्भर व संपन्ना बन सके। इस दौरान डीएफओ अंकित पांडे भी मौजूद रहे।

इस मौके पर आइआइएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय ने कहा कि जिला प्रशासन हरदा के साथ यह सहयोग आइआइएम इंदौर द्वारा हरदा जिले की अर्थव्यवस्था, बाजार और जीवन शैली में सुधार के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि समाज को सशक्त बनाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए हरदा जिले की महिलाओं को वित्तीय साक्षरता और आजीविका के संबंध में प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे आत्मनिर्भर बन सके। प्रो. राय ने बताया कि आइआइएम इंदौर रूरल इंगेजमेंट प्रोग्राम आयोजित करता है, जिसमें विद्यार्थी मध्य प्रदेश के जिलों के गांवों का दौरा करते हैं और ग्रामीणों की समस्याओं को समझकर उनके समाधान के उपाय खोजते हैं।

बढा सकेंगे बांस का उत्पादन और निर्यात

कलेक्टर ऋषि गर्ग ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को आईआईएम इंदौर द्वारा तैयार किए गए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह सहयोग ग्रामीण प्रबंधन, नेतृत्व और प्रशासन की हमारी समझ को मजबूत करने में मदद करेगा।

साथ ही महिलाओं के लिए वित्तीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जिले की महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सक्षम होंगी बल्कि उनके आत्मविश्वास और आय में वृद्धि होगी। कलेक्टर गर्ग ने कि आइआइएम इंदौर की मदद से हरदा जिले के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के अंतर्गत चयनित बांस का उत्पादन और निर्यात बढ़ा सकेंगे, जिससे बांस उत्पादकों की आए बढ़ेगी एवं उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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