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- शहर के घंटाघर चौराहे पर ट्रैफिक कंट्रोलर के नाम से जाने जाते है जगदीश, घंटाघर क्षेत्र में बाइक चोरी पर लगी लगाम, पुलिस भी बड़े कार्यक्रमों में सौंपती है जिम्मेदारी

फोटो 14 एचआरडीजेयूएन1, 2 हरदा। घंटाघर क्षेत्र में ड्यूटी करते जगदीश मीणा। (फोटो- नवदुनिया)

अतुल तिवारी, हरदा। नवदुनिया प्रतिनिधि

सेवा करने का जुनून एक बार सिर चढ़ जाए, फिर कुछ भी मयाने नहीं रखता। शहर में ट्रैफिक कंट्रोलर के नाम से मशहूर जगदीश मीणा के सिर भी ऐसा ही जुनून सवार है। जगदीश 7 वर्षों से बिना किसी नौकरी-वेतन के शहर का यातायात नियंत्रित कर रहे हैं। वे शहर के सबसे व्यस्ततम घंटाघर चौराहे पर ड्यूटी करते हैं। इनके रहते इस चौराहे से मोटर साइकिल चोरी पर भी लगाम लगी है। सात वर्षों का पुलिस रिकॉर्ड देखा जाए तो इस क्षेत्र में ट्रैफिक विवाद का कोई बड़ा केस दर्ज नहीं हुआ।

जगदीश सुबह 10 बजे से रात दस बजे तक, 12 घंटे बिना किसी वेतन के ड्यूटी करते हैं। शहर के आसपास करीब 30 किलोमीटर के दायरे में लोग इन्हें ट्रैफिक कंट्रोलर के रूप में जानते हैं। जगदीश ने 2012 में नगर रक्षा समिति का सदस्य बनकर यातायात पुलिस की मदद करना शुरू की थी। लेकिन फिर धीरे-धीरे यह काम इनका जुनून बन गया और आज 7 साल बिना किसी वेतन के निस्वार्थ भाव से शहर की सेवा करते हुए इन्होंने गुजार दिए हैं।

बाढ़ से बचाने पर किया सम्मानित

जगदीश ने वर्ष 2012 में जिले में आई बाढ़ के दौरान बेहतर बचाव कार्य किया। बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने व राहत पहुंचाने में जगदीश आगे रहे। इसके लिए उन्हें तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक कुमार सिंह ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। जगदीश 2012 से अब तक कई बार बाढ़ के दौरान राहत व बचाव कार्य कर चुके है। वर्ष 2015 में तत्कालीन कलेक्टर रजनीश श्रीवास्तव ने भी जगदीश मीणा को उनके विशेष कार्य के लिए गणतंत्र दिवस समारोह में प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। इनके अलावा एसपी होशंगाबाद, नगर विधायक कमल पटेल व थाना प्रभारी भी जगदीश को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित कर चुके हैं। शहर में आज भी जब कोई बड़ा कार्यक्रम या सभा होती है। तो यातायात नियंत्रित करने जगदीश की ड्यूटी वहां लगाई जाती है।

घंटाघर 3 वर्ष नो-पार्किंग में रहा तब्दील

घंटाघर क्षेत्र शहर का सबसे व्यस्ततम इलाका है। यहां ट्रैफिक नियंत्रित करना आसान नहीं। इस वजह से पुलिस ने वर्ष 2012 में इसे नो-पार्किंग जोन में तब्दील कर दिया और जगदीश की ड्यूटी लगाकर व्यवस्था बनाने की कमान सौंपी गई। उन्होंने तीन वर्ष तक यहां नो-पार्किंग बनाए रखी। लोगों से अपील कर उन्हें पार्किंग न करने के लिए कहा। लोग भी जगदीश की बात को मानते है। क्योंकि वह विनम्र लहजे में लोगों से अनुरोध करते हैं। धीरे-धीरे लोग भी ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने में मदद करने लगे। जगदीश बताते हैं कि दोपहर में जब वे खाना खाने जाते थे। तब भी लोग गाड़ियां यहां-वहां खड़ी नहीं करते थे। जगदीश ने बताया कि उन्हें कोई सैलरी नहीं मिलती है। इस वजह से पब्लिक व पुलिस अधिकारी ही उनकी आर्थिक रूप से कभी-कभी मदद कर देते हैं।

ड्यूटी के दौरान नहीं आई कोई शिकायत

जगदीश मीणा की ड्यूटी का रिकॉर्ड अच्छा है। वे कई वर्षों से वहां ड्यूटी कर रहे है। उनकी ड्यूटी के दौरान कोई शिकायत अभी तक नहीं है। नगर रक्षा समिति के सदस्य बनकर ही वे ड्यूटी करते है। इस वजह से उन्हें वेतन नहीं मिलता है।

-मनोज सिंह, टीआई, थाना सिविल लाइन।

बाइक चोरी की नहीं हुई कोई घटना

जगदीश मीणा तो नगर रक्षा समिति के स्वयं सेवक है। इसलिए वेतन का तो कोई प्रावधान नहीं है। बिना वेतन के ही वे पिछले छह-सात वर्षों से घंटाघर क्षेत्र में ड्यूटी कर रहे है। इस दौरान कोई बाइक चोरी व ट्रैफिक विवाद का कोई बड़ा केस नहीं हुआ। जगदीश काफी मुस्तैद रहते हैं और काफी अच्छे से यातायात को नियंत्रित करते हैं। इसलिए उनकी ड्यूटी शहर के सबसे व्यस्ततम घंटाघर चौराहे पर लगाई गई है।

-सुभाष दर श्यामकर, टीआई, यातायात थाना।

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