अनिल माणिक, हरदा/खिरकिया। नवदुनिया प्रतिनिधि। शासकीय स्कूलों मेंं मध्याह्न भोजन के माध्यम के बच्चों को पोषित करने के लिए विद्यालयों में न्यूट्रीशियन गार्डन (पोषण उद्यान) बनाए गए हैं। इनमेंं सब्जियों के पौधे लहलहाने लगे हैं।

ब्लाक के चयनित विद्यालयों में न्यूट्रीशियन गार्डन बनाए गए है। वर्तमान में विद्यालय बंद है। मध्याह्न भोजन व्यवस्था भी बंद है। लेकिन शिक्षक गार्डन को संवार रहे हैं। उनकी देखभाल कर रहे है। इससे विद्यालयों में गार्डन बनकर तैयार हो गए है।

मध्याह्न भोजन के लिए बाहर से सब्जी बुलाना पड़ता है, लेकिन अब विद्यालय में ही बच्चों को गार्डन के माध्यम से ताजी और पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध हो सकेंगी। शासन के निर्देश पर विद्यालयों के समीप खुले क्षेत्र में गार्डन बनाए गए है, इसमें हरी व पौष्टिक सब्जियां लगाई गई है। इस गार्डन की देखभाल कोई और नहीं बल्कि स्कूल स्टॉफ व बच्चों द्वारा किया जाना है, लेकिन वर्तमान में विद्यालय बंद है, तो शिक्षकोंं द्वारा इसकी देखभाल की जा रही है।

ब्लाक के 54 स्कूलों में विकसित गए पोषण उद्यान

ब्लाक में न्यूट्रीशियन गार्डन के लिए प्रारंभिक रूप से 54 विद्यालयों का चयन किया गया है। इन सभी विद्यालयों में पोषण गार्डन विकसित किए जा चुके है। गार्डन निर्माण के लिए प्रत्येक विद्यालय को शासन द्वारा 5-5 हजार रुपए शाला प्रबंधन समितियों के खातों में जमा किए गए थे। जिसे खर्च कर विद्यालय परिसर या आसपास जमीन की तलाश कर गार्डन विकसित किए है।

शेड का निर्माण या तार फेसिंग कार्य भी किया गया है, ताकि सब्जियां सुरक्षित रहें। गार्डन में विद्यालय द्वारा हरी सब्जियां लगाई गई है, इनमें से कुछ पौधों में फल आना भी शुरू हो गए है। फिलहाल 54 विद्यालयों का ही चयन किया गया है, जबकि ब्लाक में 189 प्राथमिक एवं 97 माध्यमिक शालाएं है। इनके बच्चों को मध्याह्न भोजन प्रदान किया जाता है। ऐसे में अन्य विद्यालयों में भी इस प्रकार के गार्डन विकसित किए जाने की आवश्यकता है, ताकि वहां के बच्चे भी इसका लाभ ले सके।

गार्डन की इन सब्जियों से बच्चों को मिलेगा पोषण

न्यूट्रीशियन गार्डन में भिंडी, पालक, लौकी, करेला, खीरा, कद्दू, तरबूज, खरबूजा, बैगन, शलजम, गाजर, मूली, टमाटर, मटर, मिर्च, पत्ता गोभी, फूल गोभी, पालक, सरसों, मैथी, धनिया, शिमला मिर्च, लहसुन, चुकंदर, शलजम, गाजर, मूली, चौलाई, प्याज, तुरई सहित अन्य पौष्टिक सब्जियां उगाई जा सकेगी। इन सब्जियों को मिड-डे मील में शामिल करने से इसमें पोषक तत्वों की मात्रा बेहतर होगी। इसीलिए किचन गार्डन का नाम बदल कर न्यूट्रिशन गार्डन किया गया है। इसमें रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं होगा। सिर्फ जैविक खाद का प्रयोग किया जाएगा।

इस संबंध में खिरकिया बीआरसी जीआर चौरसिया का कहना है कि ब्लाक की 54 शालाओं में न्यूट्रीशियन गार्डन बनाए जा चुके हैं। कई गार्डन में पौधे बड़े हो गए है। कुछ में फल आना भी प्रारंभ हो गया। आगामी समय में अन्य विद्यालयों में भी पोषण उद्यान लगाए जाएंगे।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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